April 17, 2026 6:00 pm

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शहडोल शिक्षा विभाग में ₹5 करोड़ का महाघोटाला, जाँच ठंडे बस्ते में

“फर्जी फर्में, फर्जी बिल, बिना टेंडर के भुगतान और जांच दबाने की साजिश, पुरे मामले में प्रशासन की चुप्पी पर गंभीर सवाल..”
The mukhbir राहुल सिंह राणा शहडोलशिक्षा विभाग में वर्षों से चल रहे कथित भ्रष्टाचार का ऐसा विस्फोटक मामला सामने आया है, जिसने पूरे संभागीय और जिला प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आयुक्त शहडोल को जनसुनवाई के दौरान 9 सितंबर 2025 को प्रस्तुत की गई एक प्रमाणित शिकायत में शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर फर्जी फर्मों के जरिए करोड़ों रुपये के गबन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जांच को ठंडे बस्ते में डालने के आरोप लग रहे हैं। ₹5 करोड़ से अधिक के घोटाले का दावा शिकायतकर्ता लक्ष्मण गुप्ता (निवासी पांडव नगर, शहडोल) द्वारा दिए गए शिकायती आवेदन में आरोप लगाया गया है कि
फूल सिंह मरपाची (प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी), अरविंद कुमार पांडे (ए.पी.सी. राष्ट्रीय शिक्षा मिशन) और संतोष कुमार मिश्रा (तत्कालीन लेखाधिकारी) ने वर्ष 2022 से 2025 के बीच पेंटिंग, मरम्मत, निर्माण, फर्नीचर, स्टेशनरी, प्रशिक्षण और अन्य शैक्षणिक मदों के नाम पर फर्जी बिलों के माध्यम से कम से कम ₹5 करोड़ से अधिक का गबन किया।
शिकायत में जिन भुगतानों का स्पष्ट उल्लेख है, उनमें ₹54,00,000,  ₹15,00,000, ₹86,13,000 और ₹24,12,386
जैसी बड़ी राशियां शामिल हैं, जिनके संबंध में दस्तावेज, आदेश क्रमांक और तिथियां भी संलग्न बताई गई हैं।

सुधाकर कंस्ट्रक्शन पर विशेष फोकस

घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू सुधाकर कंस्ट्रक्शन नामक फर्म है, जिसे मात्र चार महीनों में ₹59,93,004 का भुगतान कराए जाने का आरोप है। आरोप है कि यह भुगतान
बिना निविदा, बिना तकनीकी/प्रशासनिक स्वीकृति बिना वैध GST प्रक्रिया के किया गया और राशि को अलग-अलग बिलों में बांटकर इस तरह जारी किया गया कि संदेह न हो।
जिन शासकीय स्कूलों और छात्रावासों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया, उनमें पपौंध, महदेवा, नौढिया, खडहुली, बूडवा, नकनी, सकंदी, निपनिया सहित कई संस्थान शामिल हैं।
शिकायत के अनुसार, जमीनी स्तर पर न तो पेंटिंग हुई, न मरम्मत, न सामग्री की आपूर्ति

फर्जी फर्में, नकद आहरण और कमीशन का खेल

शिकायत-पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि सुधाकर कंस्ट्रक्शन और अन्य फर्जी फर्मों से भुगतान के बाद राशि का बड़ा हिस्सा अधिकारियों के बीच बांट लिया गया, जबकि कुछ रकम प्राचार्यों और अन्य लोगों को “औपचारिकता पूरी करने” के लिए दी गई। अब मांग की जा रही है कि इन फर्मों के बैंक खातों, राशि हस्तांतरण, नकद निकासी, सप्लाई सोर्स की भी गहन जांच हो।

धमकी का माहौल

गंभीर आरोप शिकायत में प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी पर यह भी आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नियमविरुद्ध स्थानांतरण कराए और जिन कर्मचारियों से व्यक्तिगत द्वेष था, उन्हें निशाना बनाया। यहां तक कि कथित रूप से यह धमकी दी गई कि “घोटाले का खुलासा किया तो आदिवासी एवं एससी-एसटी एक्ट में फंसा दूंगा।” यदि यह आरोप सही हैं, तो मामला सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग और भय के जरिए चुप्पी थोपने का भी बन जाता है।

पहले जांचों की फाइल दबी

पहले भी हुई थी जांच, फिर भी फाइल दबी
शिकायत-पत्र के अनुसार, तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी स्व. मोहन लाल पाठक ने इन अनियमितताओं की जांच कर प्रतिवेदन उच्च अधिकारियों को भेजा था, लेकिन वह फाइल आज तक दबी हुई है।
पेंट घोटाले” की जांच भी स्कूल शिक्षा मंत्री और लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देश के बावजूद आज तक सार्वजनिक नहीं की गई।

जांच टीम बनी, फिर भी सन्नाटा

जिला पंचायत शहडोल द्वारा विशेष जांच टीम गठित की गई मुद्रिका प्रसाद सिंह (अति. सीईओ), सुबोध मेहता (वरिष्ठ लिपिक) और
अमरनाथ सिंह (जिला परियोजना समन्वयक)
4 दिसंबर 2025 को तीन दिनों में दस्तावेज प्रस्तुत करने के आदेश भी जारी हुए, लेकिन 15 दिन से अधिक बीतने के बावजूद न जांच रिपोर्ट सामने आई, न कोई ठोस कार्रवाई।

शिकायतकर्ता का आरोप 

आला अधिकारियों की आओ-भगत में दबाई जा रही जांच” सबसे सनसनीखेज आरोप यह है. कि हाल ही में 69वीं राष्ट्रीय शालेय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के दौरान भ्रष्टाचार के त्रि-आरोपी अधिकारियों को आला अधिकारियों की मेहमाननवाजी और आवभगत करते देखा गया, जिससे यह संदेश गया कि जांच को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है।

बड़ा सवाल….

क्या करोड़ों के इस कथित घोटाले की निष्पक्ष जांच होगी, क्या दोषियों पर FIR और निलंबन जैसी कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दफन कर दिया जाएगा।
शहडोल शिक्षा विभाग से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की अग्निपरीक्षा बन चुका है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला आने वाले समय में पूरे सिस्टम पर गहरे सवाल छोड़ जाएगा।

The mukhbir टीम कि नजर लगातार इस मामले बनी हुई हैं।

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Author: The Mukhbir

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