निरिक्षण के चार महीने से आदेशों की खुलेआम धज्जियां
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। नगर के वार्ड नंबर 30 स्थित कट्टठी टोला में शिक्षा नहीं दी जा रही, मौत के साथ रोज़ सौदा कराया जा रहा है। जिस स्कूल में बच्चों को सपने देखने सिखाने चाहिए थे, वहां आज छत गिरने का डर और प्रशासनिक बेरहमी पढ़ाई से बड़ी सच्चाई बन चुकी है। दिनांक 28 अगस्त 2025 को शासकीय प्राथमिक शाला कट्टठी टोला (कोड 231017209) का आकस्मिक निरीक्षण हुआ था। निरीक्षण में साफ-साफ दर्ज हुआ कि लगभग 30 वर्ष पुराना विद्यालय भवन पूरी तरह जर्जर है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

स्थिति की भयावहता को देखते हुए स्पष्ट आदेश दिए गए थे कि मरम्मत तक भवन में कक्षाएं संचालित न हों। आदेश लिखा गया कि कक्षाओं का संचालन भवन के बाहर कराया जाए, बच्चों को बरामदे की जमीन में बैठकर पढ़ते हुए चार महीने गुजर गए…न मरम्मत शुरू हुई, न वैकल्पिक व्यवस्था बनी। परिणाम यह है कि कक्षा 1 से 5वीं तक के 75 मासूम बच्चे आज भी भवन के बाहर, बरामदे और जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं।

विडंबना यह कि जर्जर भवन की छत लगातार गिर रही है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। सवाल सीधा है. क्या किसी बच्चे की जान जाएगी, तभी फाइल आगे बढ़ेगी. शासन के पास पैसा हैं, कई फंड हैं, फिर लापरवाही क्यों।
निरीक्षण के दौरान तय हुआ था कि संयुक्त आकस्मिक निधि से तत्काल मरम्मत कराई जाएगी। बजट की कोई कमी नहीं…तो फिर चार महीने तक काम क्यों नहीं शुरू हुआ. यह सिर्फ देरी नहीं, यह खुली प्रशासनिक अपराध-लापरवाही है।

तीन कमरों में पढ़ाई के निर्देश
तीन कमरों में कक्षा एक से आठवीं तक के 122 बच्चे ये शिक्षा या मज़ाक। कट्टठी टोला का हाल यहीं खत्म नहीं होता। शासकीय माध्यमिक विद्यालय कट्टठी टोला में 48 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि प्राथमिक और माध्यमिक मिलाकर 122 बच्चों को सिर्फ तीन कमरों में एक साथ पढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
अब सवाल उठता है…. क्या बच्चे किताब पढ़ेंगे या एक-दूसरे के सिर गिनेंगे. क्या यह “नवाचार” है या शिक्षा व्यवस्था का दिवालियापन।
हादसे का इंतजार कर रहा प्रशासन
यह पूरा मामला साफ बताता है कि निरीक्षण सिर्फ दिखावा बन चुका है। आदेश सिर्फ रजिस्टरों में दफन हैं। और बच्चों की सुरक्षा सबसे आखिरी प्राथमिकता है। जब छत गिरती है, तो मलबा सिर्फ ईंट-सीमेंट का नहीं होता, शासन की संवेदनहीनता भी गिरती है। अगर कल कुछ हुआ, जिम्मेदार कौन…?
आज सवाल पूछना जरूरी है. क्या बी.आर.सी.सी. या जिला शिक्षा केंद्र के अधिकारी जिम्मेदार होंगे या फिर हमेशा की तरह फाइलें बोलेंगी “जांच जारी है”
कट्टठी टोला की तस्वीर साफ कहती है. यह शिक्षा नहीं, यह बच्चों की जान के साथ किया जा रहा प्रयोग है। अब भी अगर शासन नहीं जागा, तो अगली खबर निरीक्षण की नहीं, हादसे की होगी।
इन्होने कहा…
वार्ड नंबर 30 स्तिथि शासकीय प्राथमिक शाला कट्टठी टोला (कोड 231017209) का आकस्मिक निरीक्षण मेरे द्वारा किया गया था। भवन जर्जर हालत में था कक्षाएं लगाने को मना किया गया था मरम्मत की फाइल बनाकर आगे भेज दी गई है. जल्द से जल्द भवन का मरम्मत किया जाएगा।
महेंद्र मिश्रा, बी.आर.सी.सी. सोहागपुर विकासखंड
SIR के बाद मतदाता सूची निरीक्षण के लिए मैं विद्यालय आया था जर्जर भवन देखकर मैं संबंधित अधिकारियों से बात की और नगर पालिका से क्या मदद हो सकती इस पर भी चर्चा की।
दानिश अहमद, पार्षद वार्ड नंबर 30
The mukhbir टीम शहडोल
Author: The Mukhbir
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