April 17, 2026 6:01 pm

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A.N.M. की अनदेखी बनाम सरकारी दावे, ज़मीनी हकीकत उजागर

 


वर्षों से सेवाभाव, बदले में उपेक्षा और शोषण 

The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। मध्यप्रदेश में ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली A.N.M. (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता) आज खुद व्यवस्था की अनदेखी की शिकार बनी हुई हैं। संयुक्त ए.एन.एम. एसोसिएशन (संविदा-नियमित) कर्मचारी संघ म.प्र. द्वारा जिला शहडोल के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन ने स्वास्थ्य विभाग के भीतर गहराते असंतोष और भेदभाव को उजागर कर दिया है।
ज्ञापन में उन्होंने बताया 1950 से सेवा में ANM, फिर भी हाशिए पर ANM संवर्ग स्वास्थ्य विभाग का सबसे पुराना कैडर है, जिसने ग्रामीण, दुर्गम, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, कोविड जैसी महामारी में अहम भूमिका निभाई। पोलियो, टिटनेस, खसरा जैसी बीमारियों के उन्मूलन में इनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है, फिर भी आज इन्हें आर्थिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

दोगुना कार्यभार, शून्य सुविधाएं

शासन की गाइडलाइन के अनुसार जहां ग्रामीण क्षेत्र में 2-3 हजार की आबादी पर एक ANM का प्रावधान है, वहीं वर्तमान में ANM 2 से 3 गुना अधिक जनसंख्या का कार्य कर रही हैं।
इसके बावजूद HRA, एरियर्स, TBI की कटौती
टेबलेट, सिम, नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव दुर्गम क्षेत्रों में जोखिम भत्ता एवं वाहन सुविधा नहीं ऑनलाइन पोर्टलों की तकनीकी खराबियों का दंड सब कुछ ANM को ही भुगतना पड़ रहा है।

गलती पोर्टल की और सज़ा ANM को 

अनमोल पोर्टल की तकनीकी खामियों के कारण गर्भवती महिलाओं के पंजीयन में त्रुटियां होती हैं, लेकिन जवाबदेही सिर्फ ANM पर तय की जाती है, जबकि प्रोत्साहन राशि C.H.O. और ASHA को दी जाती है. सवाल उठता है न्याय कहां है।

अनटाइड फंड में भी भेदभाव

आयुष्मान आरोग्य मंदिर को मिलने वाले ₹ 50,000  के अनटाइड फंड का उपयोग ANM की जानकारी के बिना किया जा रहा है, जबकि आवश्यक सामग्री खरीदने का बोझ ANM पर डाला जा रहा है। संघ की मांग है कि कम से कम ₹20,000 की राशि ANM को स्वतंत्र रूप से दी जाए।
प्रमुख मांगो में ANM को “सार्थक” नाम पर वेतन कटौती से मुक्त किया जाए, जोखिम भत्ता और वाहन सुविधा दी जाए, वर्षों से संविदा में कार्यरत ANM को नियमित किया जाए, वेतन विसंगति दूर कर ग्रेड-पे ₹3200 दिया जाए, पुनः नर्सिंग कैडर में शामिल किया जाए, अनावश्यक मानसिक उत्पीड़न बंद हो।

प्रशासन के लिए चेतावनी

संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इन्होने कहा…

संघ द्वारा ज्ञापन सौंपा गया है. स्थानीय समस्यायो का निराकरण जल्द किया जायेगा। रही बात सार्थक ऐप की जिसका संचालन भोपाल से किया जाता है. पत्र लिखकर भोपाल भेजा जायेगा.

डॉ राजेश मिश्रा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, शहडोल 

The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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