–बाणगंगा की भूमि सीमांकन की लगातार उठी मांग
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। शहडोल जिले की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान बाणगंगा मेला मैदान को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा खड़ा हो गया है। नगरपालिका वार्ड क्रमांक 17 के पार्षद प्रकाश नारायण शुक्ला (पिंकू) ने शहडोल सांसद हिमांद्री सिंह को पत्र लिखकर बाणगंगा मंदिर एवं मेला मैदान की भूमि का सीमांकन तत्काल कराए जाने की जोरदार मांग की है।
पत्र में पार्षद ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जिस मेला मैदान में हर वर्ष मकर संक्रांति पर ऐतिहासिक मेला लगता है, वही जमीन धीरे-धीरे घटती जा रही है, और यदि समय रहते प्रशासन जागा नहीं तो आने वाले समय में शहडोल की आस्था और सांस्कृतिक विरासत पर स्थायी संकट खड़ा हो सकता है।
“धीरे-धीरे घट रही भूमि… मेले का अस्तित्व खतरे में”
पार्षद पिंकू शुक्ला द्वारा सांसद को लिखे पत्र में उल्लेख किया गया है कि बाणगंगा मंदिर एवं मेला मैदान शहडोल जिले की पहचान, परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर है।
परंतु मेला आयोजन स्थल की भूमि कई कारणों से धीरे-धीरे सिकुड़ रही है, जिससे मेले की व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और आयोजन का भविष्य सवालों के घेरे में आता जा रहा है।
पत्र की भाषा और मुद्दे से साफ संकेत मिलता है कि मेला मैदान की जमीन पर कब्जे-अतिक्रमण के खतरे को लेकर जनप्रतिनिधि चिंतित हैं।

पत्र में उठाई गई 5 बड़ी मांगें जो प्रशासन पर बड़ा सवाल
पार्षद ने सांसद को पत्र भेजकर बाणगंगा क्षेत्र में सीमांकन और सार्वजनिक प्रदर्शन की मांग की है, जिसमें प्रमुख बिंदु हैं.
–राजस्व टीम बनाकर मेला मैदान का सीमांकन
बाणगंगा मंदिर परिसर एवं मेला मैदान की भूमि का सीमांकन राजस्व टीम से कराकर
उस पर सूचना पटल लगाया जाए, ताकि जनता को स्पष्ट पता रहे कि भूमि का नक्शा, खसरा नंबर और रकबा कितना है।
-नगर पालिका द्वारा अधिग्रहित भूमि का अलग सीमांकन
नगर पालिका शहडोल द्वारा अधिग्रहित भूमि की भी माप-सीमा तय कर
सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया जाए।
-मेला मैदान “सिकुड़ रहा” निजी भूमि अधिग्रहण की मांग
पत्र में गंभीर बात यह है कि मेला मैदान लगातार घट रहा है, ऐसे में मेला परिसर के अस्तित्व को बचाने हेतु, निजी स्वामित्व वाली भूमि का अधिग्रहण कर इसे सुरक्षित किया जाए।
-बाणगंगा परिसर में श्मशान घाट हेतु भूमि चिन्हित, श्मशान घाट हेतु भूमि को चिन्हित कर सीमांकन व सूचना पटल लगाया जाए।
-सड़क-पार्क-समुदायिक भवन में उपयोग भूमि का विवरण सार्वजनिक
पत्र में यह भी मांग है कि बाणगंगा परिसर की भूमि का उपयोग सड़क, पार्क, सामुदायिक भवन जैसे कार्यों में जितना हुआ है, उसका पूरा विवरण खसरा, नक्शा और रकवा सहित जनहित में प्रदर्शित किया जाए।

बड़ा सवाल..आस्था की जमीन पर “कौन खेल रहा काला खेल”
पत्र के सामने आने के बाद शहडोल में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर मेला मैदान की जमीन क्यों घट रही है।
क्या कहीं अवैध कब्जे-अतिक्रमण हो रहे हैं.
नगर पालिका और राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में कितना रकबा दर्ज है और जमीन पर कितना बचा है.
क्या प्रशासन की चुप्पी संरक्षण का संकेत तो नहीं.
यदि समय रहते सीमांकन और सार्वजनिक सूचना नहीं हुई तो आने वाले दिनों में यह मामला जिला स्तर का नहीं बल्कि राज्य स्तर का बड़ा विवाद बन सकता है।
सांसद से उम्मीद अब होगी बड़ी कार्रवाई,
पार्षद पिंकू शुक्ला ने सांसद हिमांद्री सिंह से आग्रह किया है कि यह मुद्दा जन-भावना से जुड़ा है, इसलिए, तत्काल सीमांकन, सूचना पटल, भूमि रिकॉर्ड सार्वजनिक, अतिक्रमण हटाओ अभियान और आवश्यक भूमि अधिग्रहण
जैसी कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
बाणगंगा सिर्फ मैदान नहीं, शहडोल की पहचान है. बाणगंगा मेला मैदान केवल एक आयोजन स्थल नहीं, बल्कि यह शहडोल की परंपरा, संस्कृति, आस्था और पहचान है।
यदि इस पर कब्जे या सीमांकन में गड़बड़ी हुई तो यह सिर्फ जमीन का नुकसान नहीं होगा, यह शहडोल की विरासत पर हमला माना जाएगा।
अब देखना यह होगा कि सांसद को भेजे गए इस पत्र के बाद प्रशासन जागता है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
The mukhbir टीम शहडोल
Author: The Mukhbir
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