–शहडोल सरकारी गोदाम में रखी हजारों बोरी धान जलकर खाक, कारण अज्ञात

The mukhbir शहडोल। गुरुवार सुबह जो हुआ, वह सिर्फ आग नहीं थी… वह सरकारी तंत्र की लापरवाही, भ्रष्ट प्रबंधन और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था की धधकती तस्वीर है।
मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एवं लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन (MPWLC-1-2-3 क्षमता 2800 मेट्रिक टन) के नरसरहा स्थित शासकीय धान गोदाम में लगी भीषण आग ने हजारों बोरी धान को राख में बदल दिया। यह धान कोई साधारण माल नहीं था यह किसानों की मेहनत, सरकारी खरीद और जनता के टैक्स के पैसों से जुड़ा अनाज था।

लेकिन सवाल यह है कि
आग लगी… या लगाई गई….?
घटना स्थल बना प्रशासनिक कैंप
आग की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड पहुंची, लेकिन तब तक लपटें अधिकांश धान को निगल चुकी थीं। आग की भयावहता को देखते हुए शहडोल फायर टीम के 8 से अधिक दमकल वाहनों को लगाया गया, मौके पर कलेक्टर केदार सिंह, एसडीएम अमृता गर्ग सहित प्रशासनिक अमला मौजूद रहा।
लेकिन असली सवाल यह है कि जब गोदाम सरकारी है, तो सुरक्षा इंतज़ाम क्या थे, फायर सेफ्टी सिस्टम काम कर रहा था या सिर्फ कागजों में था CCTV, अलार्म, गार्ड सब कहाँ थे, जला सिर्फ धान नहीं… जला करोड़ों का सरकारी धन सरकारी गोदामों में रखे अनाज का हर दाना जनता के पैसे से खरीदा जाता है।
इस आग ने सिर्फ बोरी नहीं जलाई, इसने सरकारी खजाने को भी झुलसा दिया।
ऐसे मामलों में अक्सर बाद में “शॉर्ट सर्किट”, “अज्ञात कारण”, “दुर्घटना” जैसे शब्द फाइलों में भर दिए जाते हैं।

लेकिन क्या यह सिर्फ हादसा था… या किसी गड़बड़ी पर पर्दा डालने की तैयारी
पहले गड़बड़ी, फिर आग
ऐसे कई मामले कई बार सामने आ चुके है,
जहाँ स्टॉक में गड़बड़ी, नमी, सड़न या हिसाब में गड़बड़ियां होती हैं, वहां “रहस्यमयी आग” लग जाती है। अब सवाल यह भी है, क्या यहां भी रिकॉर्ड, स्टॉक या गुणवत्ता से जुड़ी कोई सच्चाई आग में दब गई.
प्रशासन की असली परीक्षा अब
घटना के बाद मौके पर मौजूद रहना आसान है।
लेकिन असली जिम्मेदारी है, स्टॉक का पूरा ऑडिट, फायर सेफ्टी की जांच, गोदाम प्रबंधन की जवाबदेही, नुकसान की वास्तविक गणना सार्वजनिक करना.
अगर यह जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रही, तो यह आग “दुर्घटना” नहीं, व्यवस्था की विफलता कहलाएगी।
फिलहाल आग लगने का कारण अभी अज्ञात है और कितना धान गोदाम में रखा था और कितने का नुकसान हुआ है इसकी जानकारी प्रशासन ने अभी नहीं दी है.
सरकारी अनाज सुरक्षित नहीं तो कौन सुरक्षित है, लापरवाही साबित हुई तो कार्रवाई होगी या फाइल बंद…
यह सिर्फ आग नहीं थी…
यह सिस्टम की दरारों से निकली चिंगारी थी।
अब देखना है..सच सामने आता है… या राख में दफन हो जाता है।
The mukhbir से जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा
Author: The Mukhbir
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