April 17, 2026 4:39 pm

सच सीधा आप तक

बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ “सीबीएसई” के नाम पर भ्रम, शांति देवी मेमोरियल स्कूल कटघरे में…

क्या अभिभावकों को “सीबीएसई पैटर्न” के नाम पर गुमराह किया गया….
The mukhnir राहुल सिंह राणा, शहडोल। शिक्षा मंदिर माने जाने वाले स्कूल यदि भरोसे की जगह असमंजस और अनिश्चितता का केंद्र बन जाएँ, तो सबसे बड़ी कीमत मासूम बच्चों को चुकानी पड़ती है। कोटमा तिराहा, प्लॉट नंबर-7 में संचालित “शांति देवी मेमोरियल स्कूल” को लेकर ठीक ऐसा ही गंभीर सवाल खड़ा हो गया है।
साल 2022-23 में स्कूल की शुरुआत के दौरान प्रबंधन द्वारा दावा किया गया कि स्कूल का आवेदन सीबीएसई मान्यता के लिए भेज दिया गया है और जल्द ही एफिलिएशन मिल जाएगा। लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी स्कूल को सीबीएसई की आधिकारिक संबद्धता नहीं मिली। ऐसे में अब 5वीं 15 और 8वीं 10 के लगभग 25 बच्चे सीधे अनिश्चितता के भंवर में खड़े हैं।

पढ़ाई “सीबीएसई पैटर्न” से, परीक्षा किस बोर्ड से..

सत्र 2025-26 में बच्चों को जो पुस्तकें पढ़ाई गईं, वे सीबीएसई पैटर्न आधारित बताई गईं। लेकिन अब परीक्षा सिर पर है और अचानक बच्चों को हिंदी, संस्कृत और इंग्लिश विषयों के लिए “परीक्षा अध्ययन” और “गाइड” लाने को कहा जा रहा है। मुखबिर सूत्रों के अनुसार:
साइंस, मैथ्स, SST विषय NCERT पुस्तकों से कुछ हद तक मेल खा जाते हैं.
परंतु भाषाई विषय हिंदी, संस्कृत और इंग्लिश मध्यप्रदेश बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन पैटर्न से कुछ अलग पड़ रहे हैं.
अब सवाल यह है. 10 महीने की पढ़ाई के बाद, परीक्षा से कुछ दिन पहले बच्चे पूरा सिलेबस “गाइड” से कैसे कवर करेंगे।

सबसे बड़ा सवाल अगर बच्चे फेल हुए तो जिम्मेदार कौन…?

5वीं और 8वीं की बोर्ड-प्रकृति की परीक्षाएँ केंद्र आधारित होती हैं। और बच्चों को परीक्षाएं दूसरे केंद्रों में जाकर देना पड़ता है. यदि बच्चे असफल होते हैं तो क्या जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन लेगा, क्या अभिभावकों को गलत शैक्षणिक दिशा में रखा गया, क्या “सीबीएसई पैटर्न” शब्द का इस्तेमाल सिर्फ प्रवेश बढ़ाने के लिए किया गया।
यह मामला केवल शैक्षणिक नहीं, नैतिक और कानूनी जवाबदेही का भी बनता जा रहा है।

सीबीएसई मान्यता मज़ाक नहीं, सख्त नियमों की कसौटी

सीबीएसई संबद्धता केवल नाम का टैग नहीं है। इसके लिए बोर्ड ने स्पष्ट एफिलिएशन बाय-लॉज़ तय किए हैं, जिनमें शामिल हैं.
भूमि व आधारभूत ढांचा सामान्यत 6000-8000 वर्ग मीटर भूमि, खेल मैदान न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर, स्वामित्व या कम से कम 15 वर्ष की लीज.
भवन व कक्षाएँ, प्रत्येक कक्षा लगभग 500 वर्ग फीट, प्रति छात्र 1 वर्ग मीटर स्थान.
अलग-अलग साइंस और कंप्यूटर लैब (1200 वर्ग फीट), लाइब्रेरी (1200 वर्ग फीट), लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय.
स्टाफ मानक, योग्यताधारी शिक्षक, छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 से अधिक नहीं, प्रिंसिपल, PET, लाइब्रेरियन, क्लर्क अनिवार्य।
सीबीएसई की मान्यता सुरक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और शिक्षण गुणवत्ता की संयुक्त जांच के बाद मिलती है. केवल बोर्ड पैटर्न की किताबें पढ़ाने से नहीं।

शिक्षा या प्रयोगशाला…

बच्चों के भविष्य पर यह स्थिति किसी शैक्षणिक प्रयोग से कम नहीं दिखती। अभिभावकों का भरोसा टूटा तो उसका असर केवल रिज़ल्ट पर नहीं, बच्चों के आत्मविश्वास पर भी पड़ेगा।

अब क्या होना चाहिए..

शिक्षा विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, स्कूल को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए, वास्तविक मान्यता स्थिति क्या है., बच्चों के शैक्षणिक नुकसान की भरपाई का रोडमैप बने, अभिभावकों को भ्रम से बाहर लाया जाए।
यह मामला सिर्फ एक स्कूल का नहीं, यह उस भरोसे का है, जो अभिभावक अपनी मेहनत की कमाई और बच्चों के सपनों के साथ स्कूल के हवाले करते हैं।
अगर शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता नहीं होगी, तो भविष्य की नींव ही हिल जाएगी।
इनका कहना है….
मैं अभी दिल्ली में ही हूँ हमारे द्वारा सीबीएसई के सभी मानक पूरे कर लिए गए हैं. हमारे यहां सीबीएसई की टीम ने इंस्पेक्शन भी कर लिया है. जल्द हमें मान्यता मिल जाएगी.”
राजन शर्मा
प्रबंधक, शांति देवी मेमोरियल स्कूल, शहडोल 
The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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