जब अचानक दौड़ पड़ी बाघिन वायरल वीडियो…
राहुल सिंह राणा, ताला/उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक रोमांचक और भयभीत कर देने वाला वीडियो सामने आया है, जिसमें झाड़ियों में खड़ी एक बाघिन अचानक पर्यटकों की ओर दौड़ लगाती दिखाई देती है। यह दृश्य इतना अप्रत्याशित था कि वहां मौजूद पर्यटकों की सांसें थम सी गईं। डर के मारे जिप्सी में बैठे पर्यटक गाड़ी से भागने लगे। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
जब बाघिन ने दिखाई अपनी फुर्ती
वीडियो में दिखता है कि बाघिन झाड़ियों में खड़ी थी। कुछ ही क्षण बाद वह अचानक दौड़ने लगती है। पर्यटक अपनी जिप्सी को सड़क के किनारे रोककर इस नजारे को देखने लगे, लेकिन तभी बाघिन ने दिशा बदलते हुए जिप्सी की ओर दौड़ लगा दी। हालांकि, बीच में लगी रेलिंग की वजह से बाघिन रास्ता बदलकर तालाब की ओर निकल गई। वहीं पर्यटकों की जिप्सी तेज़ी से आगे बढ़ गई। इस दौरान किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन घटना ने सबको दहला दिया।
रेंजर को तलब कर दी गई हिदायत
मामले पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के निदेशक अनुपम सहाय ने बताया कि वीडियो बांधवगढ़ का ही है। उन्होंने कहा —
“यह स्पष्ट नहीं है कि बाघिन ने वास्तव में वाहन सवार लोगों को दौड़ाया या नहीं, लेकिन सावधानी के तौर पर ताला रेंजर को तलब कर घटना की जानकारी ली गई है।”
उन्होंने साथ ही पर्यटकों और राहगीरों से अपील की कि वे जंगल के नियमों का पालन करें। उन्होंने कहा कि पार्क के अंदर वाहन रोककर या वन्यजीवों के पास उतरना सख्त वर्जित है। ऐसा करने से जानमाल का खतरा बढ़ सकता है।
कहां की है यह घटना
पार्क प्रबंधन के अनुसार, यह वीडियो मगधी गेट के पास कोलुहाबाह क्षेत्र का है। यह इलाका ताला और खेतौली रेंज के बीच स्थित है, जहां अक्सर बाघों की गतिविधियां देखी जाती हैं। बताया जा रहा है कि यह घटना 27 अक्टूबर की सुबह की सफारी के दौरान की है।
कब होती है बाघिन ‘अटैकिंग मूड’ में…?
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक के मुताबिक,
“जब बाघिन अपने शावकों के साथ होती है या सड़क पार कर रही होती है, तब यदि उसे बार-बार परेशान किया जाए या रास्ता रोका जाए, तो वह आक्रामक हो जाती है।”
उन्होंने बताया कि वाइल्डलाइफ में ऐसी घटनाएं सामान्य हैं, लेकिन पर्यटकों को हमेशा सतर्क रहना चाहिए। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
वायरल वीडियो ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि जंगल में ‘एडवेंचर’ और ‘सावधानी’ दोनों का संतुलन जरूरी है।
बांधवगढ़ जैसे प्राकृतिक आवासों में वन्यजीवों की सीमाओं का सम्मान करना ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है।









