April 17, 2026 6:01 pm

सच सीधा आप तक

शहडोल में शराब माफिया का जंगलराज

 

अवैध पैकारी बेलगाम, विभाग कि मौन स्वीकृति, कार्रवाई शून्य

The mukhbir शहडोल। जिले में शराब कारोबार को लेकर हालात बेकाबू होते दिख रहे हैं। जिले में पांच सर्किल, दो बांड, एक संभागीय वेयर-हाउस, एक देशी वेयर-हाउस, 4 लाइसेंसी बार जिनमे 1 मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग सरसी, 1 रेस्टोरेंट बार व 2 होटल बार और 29 कंपोजिट शराब दुकानों के बावजूद विभागीय अमले की कमी और सुस्त कार्यशैली ने शराब माफिया के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

आबकारी अधिकारी (जिनके पास उमरिया जिले का भी प्रभार) और एक सब-इंस्पेक्टर.. अमला नगण्य होने से नियंत्रण पूरी तरह ढीला, जिसका सीधा फायदा अवैध शराब बेचने वालों को मिल रहा है। जिले के हालात ऐसे हो चुके हैं कि गांव-गांव में खुलेआम पैकारी चल रही है और विभाग के पास सिर्फ कागज़ी रिपोर्टें बची हैं।

हर सर्किल में अवैध पैकारी का साम्राज्य कार्रवाई “शून्य”

मुखबिर बताते हैं कि जिले के हर सर्किल के प्रत्येक गांव में अवैध शराब की बिक्री एक आम बात बन चुकी है।
अवैध अंग्रेजी शराब हो या देशी, पैकार मज़े से माल सप्लाई कर रहे हैं। पकड़ाई, जब्ती, कार्रवाई.. ये शब्द अब सिर्फ विभाग की फाइलों में नज़र आते हैं। जमीनी हकीकत यह है कि अवैध अंग्रेजी शराब पर कार्रवाई लगभग शून्य के बराबर है।

शहडोल में अवैध अहातों की बाढ़

जिले में अवैध अहातों का संचालन धड़ल्ले से, बिना अनुमति शराब परोसी जा रही। सबसे चौंकाने वाली बात कई प्रतिष्ठित होटल भी गुपचुप शराब परोसने में शामिल, जबकि लाइसेंस सिर्फ खाने-पीने और रहने का हैं। घरेलू पार्टियों, बर्थडे सेलिब्रेशन और रात के आयोजन के नाम पर होटलों में अवैध सर्विंग, और विभाग पूरी तरह मौन।

पैकारों और होटल संचालकों की बल्ले-बल्ले

न जांच, न कार्रवाई, न कोई सवाल…जिले में शराब माफिया का नेटवर्क इतना मजबूत कि
वैध दुकानें चलें या न चलें, अवैध अहाते हर रात खचाखच भरे मिल जाते हैं। सवाल यह…
क्या विभाग की ये चुप्पी मिलीभगत है या बेबसी
और कब तक प्रतिष्ठित होटल “VIP शील्ड” में शराब परोसते रहेंगे.

मुखबिरों की माने तो शहडोल में बिकने वाली शराब का बड़ा हिस्सा सीमावर्ती राज्यों तक भेजा जा रहा है, यानी अवैध कारोबार सिर्फ जिले में ही नहीं, सरहद पार तक फैला हुआ है।

ठेके 9 ग्रुप के कब्ज़े में नियंत्रण कौन करे

पूरे जिले में देशी और विदेशी शराब की दुकानों का ठेका 9 बड़े ग्रुप संभाल रहे हैं। जिन्हें 3 व्यक्ति ही कंट्रोल कर रहें हैं. यानी पूरा नियंत्रण कुछ चुनिंदा हाथों में है, लेकिन इसके बावजूद न तो दुकानों पर पारदर्शिता दिख रही है, न ही डिपो और सर्किल स्तर पर सख़्ती। जब अमला ही नाममात्र हो, जांचकर्ता सिर्फ एक हो, और नेटवर्क इतने बड़े..तो अवैध कारोबार की जड़ें गहरी होना तय है।

विभाग की चुप्पी सवालों के घेरे में

क्या विभाग अमले की कमी का बहाना बना रहा है…?

क्या अवैध शराब पर आंखें बंद कर ली गई हैं..?

क्या माफिया की पहुँच व्यवस्था से ज़्यादा मजबूत हो चुकी है..?

और सबसे बड़ा सवाल जिले में कानून कौन चला रहा है. विभाग या शराब का सिंडिकेट…?

जिले में शराब कारोबार की वर्तमान स्थिति यह साबित करती है कि न तो निगरानी है, न रोकथाम, न नियंत्रण..यह एक तरह का खुलेआम जंगलराज है, जिसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

जिले में बढ़ता अपराध

यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो अपराध बढ़ेगा, स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ेंगे, तस्करी और अवैध व्यापार और मजबूत होगा, सरकारी राजस्व को बड़ा नुकसान होगा और सबसे गंभीर अवैध शराब से जनहानि का खतरा हमेशा बना रहेगा।

जिला प्रशासन को कठोर कदम उठाने होंगे

शहडोल में शराब कारोबार की वर्तमान स्थिति चेतावनी है।
और जरूरत है. मजबूत और पर्याप्त अमले की, नियमित छापेमारी की, पैकारों पर कठोर कार्रवाई की और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की। जब तक शराब सिंडिकेट की जड़ें नहीं काटी जातीं, तब तक शहडोल में व्यवस्था कायम होना मुश्किल है।

इस समाचार के लिए अधिकारी का पक्ष जानने के लिए जिला आबकारी अधिकारी सावित्री भगत से उनके फोन न. 8871267275 में सम्पर्क किया गया. उनका फोन रिसीव नही हुआ..

The mukhbir से चंदन कुमार वर्मा की रिपोर्ट

The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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