राहुल सिंह राणा, शहडोल। शहडोल-बुढ़ार मार्ग पर यातायात विभाग ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नर्मदा बस क्रमांक MP-54-P-0477 की जांच की। जांच में यह तथ्य सामने आया कि बस के पास भले ही स्पेशल परमिट मौजूद था, लेकिन उसका संचालन स्टेज कैरिज परमिट की तरह नियमित रूट पर किया जा रहा था, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है।
सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची सूबेदार प्रियंका शर्मा ने बस के दस्तावेजों का निरीक्षण कर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की।
नियमों के उल्लंघन पर बस ऑपरेटर पर ₹10,000 का चालान मौके पर ही काटा गया।
सूबेदार प्रियंका शर्मा ने कहा कि
“परमिट शर्तों का उल्लंघन गंभीर विषय है। नियम विरुद्ध संचालन पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।”
स्पेशल परमिट का खेल, सूत्रों के दावे चौंकाने वाले
उधर परिवहन और संबंधित विभागों में स्पेशल परमिट की अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि स्पेशल परमिट निर्गम में अनियमितताएँ और कथित आर्थिक लेन-देन का खेल लंबे समय से चल रहा है।
सूत्र बताते हैं कि
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कुछ लोगों को मुँह-देखी परमिट जारी की जा रही है
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कथित रूप से ₹40,000 से ₹50,000 तक वसूली की बात सामने आती रही है
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जबकि सरकार द्वारा निर्धारित शुल्क मात्र ₹10,000 है
हालाँकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार बढ़ते आरोपों ने इस पूरे सिस्टम पर पारदर्शिता के सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन के लिए चुनौती, पारदर्शिता बनाम अनियमितताएँ
एक तरफ यातायात विभाग नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्पेशल परमिट के कथित दुरुपयोग की चर्चाएँ विभाग की छवि को प्रभावित कर सकती हैं। परिवहन व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में कड़े ऑडिट, जांच और परमिट प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, ताकि अनियमितताओं पर लगाम लगाई जा सके।
नर्मदा बस पर की गई कार्रवाई जहां यातायात विभाग की सख्ती को दर्शाती है, वहीं स्पेशल परमिट को लेकर उठ रहे सवाल बड़े स्तर पर जांच की मांग करते दिखाई दे रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस मामले में आगे कोई व्यापक कदम उठाया जाएगा या नहीं।
The mukhbir टीम शहडोल
Author: The Mukhbir
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