कर्नाटक से आई महिलाओ का फूटा गुस्सा- उम्र धोखाधड़ी, अफसरों की बेरुखी और अव्यवस्था के गंभीर आरोप…
The mukhbir उमरिया। जिले में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय शालेय फुटबॉल प्रतियोगिता शनिवार को उस समय विवादों के शिकंजे में फंस गई जब कर्नाटक से आई महिला अभिभावकों ने उम्र घोटाले, अव्यवस्था और अफसरों के दुर्व्यवहार के बड़े आरोप जड़ दिए। प्रतियोगिता अंडर-14 श्रेणी की है, लेकिन दावा किया जा रहा है कि मैदान में 17 से 20 वर्ष के खिलाड़ी खेल रहे हैं. और यह बात सुनते ही माहौल गरमा गया।
उम्र धोखाधड़ी का विस्फोटक आरोप
कर्नाटक की अभिभावक अश्विनी, जो अपने बेटे का मैच देखने परिवार सहित उमरिया पहुंचीं, मैदान में दाखिल हुईं तो उनका गुस्सा फट पड़ा। उन्होंने बताया.
“हम तो 14 साल के बच्चों का फुटबॉल देखने आए थे, पर यहां कई टीमों में 17-20 साल तक के खिलाड़ी खेलते दिखे। ये अंडर-14 है या अंडर-20..? ऐसे में हमारे छोटे बच्चों का खेल कैसे सुरक्षित और निष्पक्ष रहेगा?”
माता-पिता ने आरोप लगाया कि करीब 20 टीमों में उम्र से बड़े खिलाड़ी शामिल हैं और आयोजकों ने इसे पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया।
अफसरों पर गंभीर आरोप- “कलेक्टर ने जवाब तक देना उचित नहीं समझा”
अश्विनी ने आरोप लगाया कि जब वे शिकायत लेकर कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन तक पहुंचीं, तो उनसे उम्मीद के विपरीत व्यवहार मिला।
उनका कहना था.
“हमने आग्रह किया कि इस गंभीर धोखाधड़ी की जांच करिए, पर उन्होंने न सहयोग किया, न स्पष्ट जवाब दिया। हमें बार-बार इधर-उधर भेजा जा रहा था। एक अभिभावक के साथ ऐसा व्यवहार शर्मनाक है।”
स्थानीय प्रशासन का यह रवैया विरोध की चिंगारी को और भड़का गया…
सोशल मीडिया में आग-आरटीआई एक्टिविस्ट भी कूदे
घटना का वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार शुरू हो गई। आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा
“नेशनल स्कूल प्रतियोगिता जैसे बड़े आयोजन में उमरिया कलेक्टर की लापरवाही साफ दिख रही है। माताओं के साथ दुर्व्यवहार अस्वीकार्य है, ऐसे अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।”

कलेक्टर का नही उठा फोन “सरकारी चुप्पी” ने बढ़ाई शंकाएँ
जब मीडिया ने कलेक्टर का पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। इससे पूरे मामले में प्रशासनिक पारदर्शिता पर और उंगलियाँ उठने लगी हैं।
बड़ा सवाल- निष्पक्ष खेल या सेटिंग का खेल
राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में इतनी बड़ी संख्या में कथित उम्र धोखाधड़ी सामने आना सिर्फ एक शिकायत नहीं, पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है।
अगर छोटे बच्चों के साथ अन्याय हो रहा है, तो यह पूरे देश के खेल भविष्य के साथ खिलवाड़ है।
अब देश की निगाहें उमरिया पर…
मामला अब बेहद संवेदनशील हो चुका है।
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क्या टूर्नामेंट रोका जाएगा…?
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क्या सभी खिलाड़ियों का उम्र सत्यापन दोबारा होगा…?
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क्या अफसरों पर कार्रवाई होगी…?
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क्या अभिभावकों को न्याय मिलेगा…?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में तय करेंगे कि उमरिया सिर्फ एक खेल आयोजन का स्थल था…या खेल व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी का गवाह।
The mukhbir से राहुल सिंह राणा
Author: The Mukhbir
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