
सोहागपुर की खसरा नंबर 867 रकवा 8 एकड़ पर भू-माफियाओं के कब्जे की साजिश पर बड़ा खुलासा
The mukhbir राहुल सिंह राणा-शहडोल। जिला प्रशासन की नाक के नीचे वर्षों पुराने राजकाज की धूल में दबा एक सच आज फिर बाहर निकल आया है। सोहागपुर राजस्व ग्राम की वह जमीन… वही खसरा नंबर 867, जिसे कभी भविष्य में औद्योगिक विकास की उम्मीदों से जोड़ा गया था, आज भू–माफिया की लालच और प्रशासनिक ढिलाई की भेंट चढ़ती नज़र आ रही है।
जंगल की ज़मीन… और भू–माफिया की नज़र
वर्ष 1990 में वन विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष स्व. लल्लू सिंह द्वारा इस भूमि पर पॉलीथीन फैक्ट्री स्थापना का प्रस्ताव रखा गया था। कलेक्टर शहडोल द्वारा मंजूरी भी दी गई। 1992 तक औपचारिक तैयारियाँ के साथ फैक्ट्री बनी लेकिन, 4-5 वर्षो में ही वन विकास निगम ने देख रेख क्या अभाव में फैक्ट्री बंद कर दी।
यानी जमीन आज भी वन विकास निगम की है, सरकारी जमीन है, और इसका एक-एक इंच कानूनी रूप से संरक्षित होना चाहिए।
लेकिन सवाल ये है कि फिर ये जमीन किसके इशारे पर भू–माफिया के निशाने पर है.
साफ-सफाई कर प्लॉटिंग कि तैयारी और शांत बैठा प्रशासन
स्थानीय निवासी प्रत्यूष गौतम ने शिकायत-पत्र देकर जिला प्रशासन से मांग की है कि इस सरकारी भूमि की शांति अब अचानक कदमों की आहट से टूटने लगी है।
भू–माफिया ने जमीन कि साफ करवा ली है. सीमाएं नापी जा चुकी है. और प्लॉटिंग के लिए तैयारी शुरू कर दी साथ ही ज़मीन को बेचने के लिए दलालों को सक्रिय भी कर दिया। यह सब काम बिना किसी सरकारी अनुमति, बिना पट्टे और बिना स्वामित्व के किया जा रहा है। एक तरह से यह खुलेआम सरकारी संपत्ति की चोरी है। जमीन के नक्शा के साथ भी छेड़छाड़ किया गया है जमीन कहीं है जिसे सीमांकन शासकीय भूमि में कराकर धोखाधड़ी करने की साजिश की जा रही है।

तो क्या.. स्थानीय प्रशासन जानकर भी अनजान
यदि सामान्य नागरिक एक फीट भी निर्माण कर दे तो नोटिस, जुर्माना और कार्रवाई के ढेर लग जाते हैं। लेकिन यहां सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा, साफ-सफाई, प्लॉटिंग की तैयारी और सौदेबाजी…फिर भी प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
क्या इस पूरे खेल के पीछे बड़ी राजनीतिक-प्रशासनिक छत्रछाया है.
क्योंकि यह जमीन कोई साधारण जमीन नहीं, वन विकास निगम की भूमि है। इस पर कब्ज़ा करना कोई छोटे-मोटे व्यक्ति का काम नहीं। यह पूरा मामला संकेत देता है कि कुछ बड़े हाथ इस कब्ज़े को संरक्षण दे रहे हैं।

वन विकास निगम की जमीन नहीं, भू–माफिया का धंधा रोके प्रशासन
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर शहडोल से मांग की है कि तत्काल मौके का निरीक्षण हो, वन विकास निगम की सोहागपुर स्थित भूमि को सुरक्षा प्रदान की जाए, भू-माफिया पर कानूनी कार्रवाई हो और कब्जे की हर कोशिश पर कठोरता के साथ रोक लगे।
अब सवाल यह कि…
अगर सरकारी जमीन सुरक्षित नहीं, तो बाकी कौन सी जमीन सुरक्षित है. वन विकास निगम की संपत्ति पर कब्ज़ा हो रहा है, क्या सरकार इससे अनजान है. क्या भू-माफिया प्रशासन से अधिक शक्तिशाली हो चुका है।
सोहागपुर की यह कहानी एक चेतावनी है. सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने वालों से ज़्यादा खतरनाक वह सिस्टम है,
जो सब जानकर भी आँखें मूँदे बैठा है। अब ज़रूरत है कलेक्टर शहडोल के सख्त हस्तक्षेप की, क्योंकि वन विकास निगम की जमीन पर माफियाओं का कब्जा सिर्फ जमीन का मामला नहीं….
यह कानून, शासन, प्रशासन और जनहित पर सीधा हमला है।
The mukhbir से जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा
Author: The Mukhbir
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