April 17, 2026 6:02 pm

सच सीधा आप तक

शासकीय बिसरा मुंडा मेडिकल कॉलेज में मानवता हुई शर्मसार…

मर्चुरी के पास नवजात का क्षत-विक्षत शव, कुत्तों ने नोचा, सिस्टम की संवेदनहीनता बेनकाब
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। संभाग के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान शासकीय बिसरा मुंडा चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय से सामने आई यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उस सिस्टम की क्रूर तस्वीर है जो कागज़ों में नियमों और ज़मीन पर लापरवाही से चलता है। जहां डॉक्टर जीवन बचाने की शपथ लेते हैं, वहीं उसी परिसर की मर्चुरी के पास एक नवजात का शव आवारा कुत्तों का निवाला बनता रहा। कमर के नीचे से क्षत-विक्षत शव, आसपास खड़े लोग, और कोई जवाबदेह नहीं, यह दृश्य मानवता पर तमाचा है।

घटना नहीं, व्यवस्था की असफलता

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नवजात का शव खुले में पड़ा था, जिसे आवारा कुत्ते नोचते रहे। किसी तरह लोगों ने शव को कुत्तों से छुड़ाया। इस अमानवीय दृश्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। भले ही वीडियो की आधिकारिक पुष्टि न हो, लेकिन जो दिख रहा है वह मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा, निगरानी और शव प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

कौन जिम्मेदार..? सवालों की लंबी सूची

मर्चुरी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा क्यों नाकाम रही, शव प्रबंधन (डिस्पोज़ल) की तय प्रक्रिया कहां फेल हुई, सीसीटीवी, गार्ड, नियमित पेट्रोलिंग सब कहां थे। आवारा कुत्तों की समस्या पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं. आशंकाएं कई हैं।लोकलाज और सामाजिक भय के कारण किसी महिला द्वारा नवजात को फेंके जाने की संभावना से लेकर कॉलेज प्रबंधन की घोर लापरवाही तक। सच्चाई जो भी हो, जिम्मेदारी तय होना अनिवार्य है।

चुप्पी भी अपराध है!

घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और कॉलेज प्रशासन की खामोशी सवालों को और गहरा करती है। जब संस्थान की साख दांव पर हो, तब तत्काल प्रेस ब्रीफिंग, स्पष्ट तथ्य और कार्रवाई की समय-सीमा अपेक्षित होती है. जो नदारद है।

अधीक्षक का बयान पर क्या इतना काफी

मेडिकल कॉलेज अधीक्षक डॉ. नागेन्द्र सिंह का कहना है कि नवजात के शव की सूचना पर पुलिस को अवगत कराकर वैधानिक कार्रवाई की गई।
..लेकिन केवल सूचना देना पर्याप्त नहीं, जब तक लापरवाही तय कर दंडात्मक कार्रवाई न हो, तब तक यह बयान औपचारिकता से आगे नहीं बढ़ता।
अब कार्रवाई नहीं हुई तो इसका जवाब जनता देगी. यह मामला मानवता, जवाबदेही और सिस्टम रिफॉर्म का है।
मांगें साफ हैं. स्वतंत्र जांच समिति का गठन हो।
जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्यवाही व FIR। मर्चुरी और अस्पताल परिसर की सुरक्षा ऑडिट। आवारा कुत्तों पर तत्काल नियंत्रण योजना। शव प्रबंधन SOP का सार्वजनिक खुलासा और सख्त पालन।
….यह सिर्फ एक नवजात की त्रासदी नहीं, यह पूरे सिस्टम का चार्जशीट है। अगर अब भी सुधार नहीं हुआ, तो इतिहास गवाह रहेगा कि संवेदनहीनता ने मानवता को रौंद दिया।

The mukhbir टीम शहडोल 

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Author: The Mukhbir

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