
-52 पत्तों के साथ 11 लाख की मसरुका जब्ती, शहडोल-उमरिया बॉर्डर पर हड़कंप
The mukhbir राहुल सिंह राणा, घुनघुटी/पाली-उमरिया। जुआ… जिसकी चमक में कई घर उजड़ते हैं, कई युवा अपराध की दलदल में उतर जाते हैं. और असामाजिक तत्वों की जेबें भरती हैं। लेकिन अब इस काले कारोबार पर घुनघुटी पुलिस ने ऐसा घातक और विस्फोटक वार किया है कि पूरे नेटवर्क की जड़ें हिल गई हैं।
उमरिया और शहडोल जिले की सरहद पर स्थित कन्नाबहरा के घने जंगल में चल रहे बड़े जुआ फड़ पर घुनघुटी पुलिस ने ऐसी ताबड़तोड़ कार्रवाई की, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी। बुधवार कि रात के अंधेरे में जंगल के बीचों-बीच “लाखों का खेल” चल रहा था, लेकिन पुलिस की रणनीति के सामने जुआरियों का पूरा साम्राज्य ध्वस्त हो गया।
ए.एस.आई. शैलेंद्र चतुर्वेदी की रणनीति: जंगल में जुआरी बने शिकार
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक उमरिया के स्पष्ट निर्देशों और थाना प्रभारी पाली राजेश चंद्र मिश्रा के मार्गदर्शन में घुनघुटी चौकी में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) शैलेंद्र चतुर्वेदी द्वारा की गई।
गुप्त सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर जंगल को चारों तरफ से लॉक किया। जैसे ही टीम ने फड़ पर धावा बोला, पूरा जंगल “जुआरियों की चीख-पुकार” और “भाग-दौड़” से गूंज उठा। 13 जुआरियों को मौके से दबोच लिया गया कार्यवाही के दौराक कुछ आरोपी घने जंगल का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे। हालांकि पुलिस टीम अब उनकी पतासाजी में लगातार जुटी हुई है और जल्द ही उनके भी पकड़े जाने की संभावना जताई जा रही है।
₹3 लाख से ज्यादा नगदी, 11 बाइक… यह साधारण जुआ नहीं, पूरा नेटवर्क
इस छापेमारी ने साफ कर दिया कि यह कोई छुटपुट खेल नहीं था, बल्कि संगठित जुआ रैकेट था, जिसमें बड़े पैमाने पर रकम और संसाधन लगे हुए थे। पुलिस ने मौके से जो बरामदगी की, वह खुद चीख-चीख कर बताती है कि यहां हर दिन लाखों का खेल चलता था जब्त सामग्री (मसरुका)
11 मोटरसाइकिलें/वाहन, 52 पत्ते (जुआ सामग्री)
₹3,02,000 नगद कुल मसरुका मूल्य लगभग ₹11 लाख बताया गया.
गिरफ्तार आरोपीयों में शहडोल से भी कई नाम
गिरफ्तार आरोपियों में शहडोल जिले के कई युवक शामिल बताए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह फड़ शहडोल-उमरिया बॉर्डर पर सक्रिय एक बड़ा नेटवर्क था। सूत्रों कि माने तो गिरफ्तार आरोपियों के नाम इस प्रकार हैं. मनोज गोले पिता श्रीराम गोले निवासी घरौला, शहडोल, अंशुल मिश्रा पिता संजय मिश्रा, निवासी शिवम कॉलोनी, शहडोल, धीरज जायसवाल पिता विनोद जायसवाल, निवासी जमुई, शहडोल, अवधेश कुमार पिता बेचू चौधरी, निवासी अमराडंडी पिता श्यामसुंदर शर्मा, निवासी विचारपुर, शहडोल, गिरीश सोनी पिता पन्ना सोनी 6निवासी केशवाही, शहडोल, लल्ला सोनी पिता स्व. कटेलाल, निवासी केशवाही शहडोल, शिवम विश्वकर्मा पिता शिवनाथ विश्वकर्मा, निवासी विचारपुर, शहडोल, करुणेश पांडे पिता मिथिलेश पांडे (अन्य विवरण अनुसार) सहित अन्य आरोपी।
इस सूची ने साबित कर दिया है कि यह नेटवर्क सीमित नहीं था, बल्कि जिलों की सीमा लांघकर सक्रिय अपराधियों की टोली थी।
जुआ फड़ नहीं… जंगल में ‘अपराध का अड्डा’
स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह वही गिरोह है जो पहले भी कई बार आसपास के थानों में पकड़ा जा चुका है, और अलग-अलग जगहों पर इनके खिलाफ कार्रवाई भी हो चुकी है। लेकिन इस बार उमरिया पुलिस की रणनीति, सटीक प्लानिंग और तीखी कार्रवाई ने जुआरियों को पूरी तरह बैकफुट पर ला दिया। यह कार्रवाई केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि जुआ के पूरे रूट और नेटवर्क पर करारा प्रहार मानी जा रही है।
उमरिया पुलिस का स्पष्ट संदेश: जंगल भी अब सुरक्षित नहीं
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई इस कार्रवाई ने दो टूक संदेश दे दिया है कि अब अवैध जुआ, सट्टा और अपराध की कोई भी गतिविधि बर्दाश्त नहीं होगी। चाहे आरोपी जंगल में छिपकर खेलें या दूरदराज़ इलाकों में नेटवर्क बनाएं. उमरिया पुलिस की नजर अब हर कदम पर है।
अब अगला वार तय
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस गिरोह के पीछे कोई “बड़ा हाथ” है, क्या यह जुआ फड़ सिर्फ शुरुआत है या इससे जुड़े अन्य अपराध भी सामने आएंगे, भागे हुए आरोपी कौन हैं और उनकी गिरफ्तारी कब सूत्रों की मानें तो यह कार्रवाई आने वाले समय में कई बड़े खुलासों की दिशा तय कर सकती है।
The mukhbir टीम शहडोल- उमरिया
Author: The Mukhbir
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