
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासकीय कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल शहडोल में जो तस्वीरें और आरोप सामने आ रहे हैं, वे न सिर्फ चिंताजनक हैं बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाते हैं।
सबसे सनसनीखेज आरोप मेडिकल सर्टिफिकेट को लेकर है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल में ₹2,000 लेकर मेडिकल सर्टिफिकेट बनाए जाने की बात सामने आ रही है। यदि यह सच है, तो यह सीधे-सीधे गरीब मरीजों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।
ओपीडी से नदारद रहते हैं डॉक्टर
अस्पताल में पदस्थ डॉक्टरो को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि वे अक्सर ओपीडी से नदारद रहते हैं, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को घंटों भटकना पड़ता है।
सरकारी अस्पतालों का मूल उद्देश्य आमजन को सुलभ इलाज देना है, लेकिन यदि डॉक्टर ही उपलब्ध न हों तो व्यवस्था का क्या औचित्य रह जाता है.
कमरा नंबर 12 बना ‘राजनीति का अड्डा’
अस्पताल के भीतर ही कमरा नंबर 12 को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। आरोप है कि यहां इलाज से ज्यादा ‘राजनीतिक’ देखने को मिलता है।
अगर अस्पताल के कमरे इलाज की जगह डॉक्टरों की आपसी प्रतिस्पर्धा सियासी गतिविधियों का केंद्र बन जाएं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि मरीजों के साथ अन्याय भी है।
‘A टीम’ बनाम ‘B टीम’ कि अस्पताल में गुटबाजी
मुखबिर सूत्रों के अनुसार अस्पताल डाक्टरों के 2 गुट सक्रिय बताए जा रहे हैं.
• A टीम में पुनीत, राजा, हर्ष और भूपेंद्र (एम. डी.) और सर्जन शामिल है.
• B टीम में अरविंद, वी.पी. और अपूर्व सर्जन शामिल है.
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर यदि गुटबाजी हावी हो जाए, तो इसका सीधा असर इलाज व्यवस्था पर पड़ना तय है। मरीजों को बेहतर उपचार देने की बजाय यदि ऊर्जा आपसी खींचतान में खर्च हो रही है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
बिना पैसे ऑपरेशन नहीं
सबसे गंभीर आरोप यह है कि बिना पैसे ऑपरेशन नहीं हो रहे। मरीजों को कथित तौर पर हलकान किया जा रहा है और अपने-अपने प्राइवेट अस्पतालों में बुलाकर सर्जरी कराने का दबाव बनाया जा रहा है।
यदि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर निजी अस्पतालों की ओर मरीजों को मोड़ रहे हैं, तो यह आचार संहिता और सेवा भावना दोनों के खिलाफ है।
सिस्टम से बड़े सवाल
यह पूरा मामला कई अहम सवाल खड़े करता है. क्या जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं. क्या गरीब मरीजों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है. क्या स्वास्थ्य विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी है. और सबसे बड़ा सवाल ढेरों शिकायतों के बाद कार्रवाई कब।
जिम्मेदारों की जवाबदेही जरूरी..
यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह सिर्फ एक अस्पताल का मामला नहीं बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी है।
जनता उम्मीद करती है कि स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेंगे।
“क्योंकि सरकारी अस्पताल ‘सेवा’ के लिए होते हैं, ‘सेटिंग’ और ‘सिस्टम’ के लिए नहीं”
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Author: The Mukhbir
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