The mukhbir जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा शहडोल। राजीव गांधी बस स्टैंड में आरक्षक महेश पाठक की मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। अब सामने आया एक्सक्लूसिव लाइव वीडियो इस हादसे को महज दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और बस माफिया के बेलगाम आतंक का सबूत बनकर रख रहा है। वीडियो में साफ दिखता है कि 47 वर्षीय आरक्षक महेश पाठक पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी कर रहे थे..सीटी बजाकर वाहनों को दिशा दे रहे थे और भीड़भाड़ के बीच ट्रैफिक को नियंत्रित कर रहे थे। तभी दादू एंड ट्रेवल्स की बस तेज रफ्तार में गेट नंबर-2 से भीतर घुसी और सीधे आरक्षक को कुचल दिया।
न चालक ने गति कम की, न किसी तरह की सावधानी कुछ ही सेकंड में एक ईमानदार जवान ने अपनी जान गंवा दी।
यह वीडियो उस सच्चाई की पुष्टि करता है कि यह घटना सिर्फ सड़क हादसा नहीं, बल्कि ओवरस्पीड, गैर-कानूनी संचालन और प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है। सवाल यह है कि दादू एंड ट्रेवल्स के हौसले इतने बुलंद कैसे हुए कि दिनदहाड़े ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को रौंद दिया गया।
हादसे के बाद चालक कपिल सिंह गोंड बस छोड़कर फरार हो गया, जिसे बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। बस को जब्त कर बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज हुआ, लेकिन लोगों का कहना है—“यह कार्रवाई नाकाफी है, असली दोषी वो अधिकारी हैं जिन्होंने अवैध बसों को खुली छूट दे रखी थी।”
यातायात विभाग ने कि थी कार्यवाही
दिसंबर माह की पहली तारीख को दादू एंड संस की बस MP-17-P-1248 फिटनेस के बिना पकड़ी गई थी, जिसे जब्त होना चाहिए था, लेकिन सिर्फ 5,000 का चालान काटकर छोड़ दिया गया। जबकि फिटनेस न होने पर परमिट और बीमा स्वतः निरस्त हो जाते हैं।
वही 6 दिसंबर को पकड़ी गई दूसरी बस MP-18-P-1255 बिना परमिट चल रही थी, जो एक शैक्षणिक संस्था के नाम पर दर्ज थी और पहले भी लगभग 1.5 लाख का जुर्माना झेल चुकी थी। इसके बावजूद बस को फिर सड़क पर उतार दिया गया. आखिर किसका संरक्षण है दादू एंड संस बस सर्विस के ऊपर.
बाजार में चर्चा गर्म है कि दादू एंड संस बस सर्विस की आधा से ज्यादा बसें बिना परमिट, बिना फिटनेस, बिना जांच के दौड़ रही हैं। पिछले एक साल में शहडोल–रीवा मार्ग पर हुई अधिकांश दुर्घटनाओं में इसी बस कंपनी की बसें शामिल रहीं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में होती रही।
परिवहन विभाग की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल है. कौन अफसर इन अवैध बसों को बचा रहा था, किसके आदेश पर बिना फिटनेस वाली बसें सड़को पर दौड़ रहीं है.
आरक्षक महेश पाठक का अंतिम संस्कार रीवा में राजकीय सम्मान के साथ होगा, लेकिन सवाल जिंदा हैं…
क्या इस मौत के बाद भी सिस्टम जागेगा या फिर यह भी एक और फाइलों में दबी कहानी बनकर रह जाएगी..
The mukhbir से जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा की रिपोर्ट









