ब्यौहारी के स्कूल में बच्चों के सामने नशे का तांडव, सिस्टम पूरी तरह बेनकाब…
The mukhbir राहुल सिंह राणा-शहडोल। यह खबर नहीं, यह शिक्षा व्यवस्था पर लगा कलंक है। यह घटना नहीं, बल्कि उस सड़े-गले सिस्टम की तस्वीर है जो बच्चों के भविष्य को शराबी हाथों में सौंपे बैठा है। शहडोल जिले की ब्यौहारी तहसील से सामने आया मामला बताता है कि अब शिक्षा का मंदिर भी सुरक्षित नहीं रहा।
जन शिक्षा केंद्र बरौघा अंतर्गत शासकीय माध्यमिक विद्यालय हिरवार में पदस्थ सहायक शिक्षक रामखेलावन चौधरी ने वह किया जिसकी कल्पना भी किसी सभ्य समाज में नहीं की जा सकती। आरोप है कि यह शिक्षक ड्यूटी के दौरान शराब पीकर स्कूल पहुंचा, और स्कूल को नशे, गालियों और गंदगी का अड्डा बना डाला।

खुले बटन, खुली चैन और खुली बेशर्मी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शिक्षक की हालत इतनी शर्मनाक थी कि पेंट की चैन खुली, शर्ट के बटन खुले, जुबान बेलगाम और दिमाग पूरी तरह सुन्न था। नशे में धुत यह शिक्षक फिल्मी गुंडे की तरह स्कूल परिसर में घूमता रहा और तहसीलदार व एसडीएम जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों को भी मां-बहन की गालियां देता रहा।
बच्चों के सामने बेशर्मी का लाइव शो
सबसे बड़ा अपराध यह नहीं कि शिक्षक नशे में था, सबसे बड़ा अपराध यह है कि यह सब मासूम बच्चों के सामने हुआ। डरे-सहमे बच्चे कक्षाओं में कैद होकर तमाशा देखते रहे। जहां किताबों की आवाज होनी चाहिए थी, वहां गालियों की गूंज थी। जहां संस्कार सिखाए जाने थे, वहां शराबी शिक्षक का नंगा चरित्र पढ़ाया गया।
वायरल वीडियो और सिस्टम की नाकामी
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। वीडियो में शिक्षक की अमानवीय, अश्लील और आपराधिक हरकतें साफ दिखाई देती हैं। हालांकि The Mukhbir इस वायरल वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन इतना तय है कि यह वीडियो प्रशासन की नाक के नीचे पल रहे भ्रष्टाचार और लापरवाही का सबूत बन चुका है।
सबूत होने के बावजूद खामोशी क्यों
सबसे डरावना सवाल यह है कि अब तक यह शिक्षक निलंबित क्यों नहीं हुआ, स्कूल में बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है, क्या सरकारी स्कूल अब शराबियों की शरणस्थली बन चुके हैं, क्या शिक्षा विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है. यह महज़ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक शोषण और सरकारी सेवा की खुली अवमानना का मामला है।
अब सिर्फ निलंबन नहीं, बर्खास्तगी जरूरी
यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो ऐसे शिक्षक को सिर्फ निलंबित करना सिस्टम की मिलीभगत मानी जाएगी। ऐसे व्यक्ति का स्थान स्कूल में नहीं, बल्कि सेवा से बाहर और कानून के कटघरे में होना चाहिए।
चेतावनी है यह घटना
यह मामला पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है.
यदि शिक्षा के मंदिर को अपवित्र करने वालों पर अब भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कल हर स्कूल में ऐसा ही तांडव होगा और प्रशासन सिर्फ तमाशबीन बना रहेगा।
अब सवाल यह नहीं कि घटना हुई या नहीं,
सवाल यह है कि क्या सरकार, प्रशासन और शिक्षा विभाग में इतनी हिम्मत है कि वह अपने सिस्टम की गंदगी साफ करे.
The mukhbir टीम शहडोल
Author: The Mukhbir
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