
The mukhbir शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय शहडोल में हाल ही में घोषित परीक्षा परिणामों को लेकर छात्रों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में एनएसयूआई शहडोल ने जिलाध्यक्ष सौरभ तिवारी के नेतृत्व में माननीय उच्च शिक्षा मंत्री के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय द्वारा घोषित बी.ए., बी.एस.सी. एवं बी.कॉम के परीक्षा परिणामों में भारी अनियमितताएँ सामने आई हैं। लगभग 70 प्रतिशत विद्यार्थियों के परिणाम विथहेल्ड, सप्लीमेंट्री अथवा फेल किए गए हैं, जो मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था को उजागर करता है।
छात्र संगठन का कहना है कि इस गंभीर विषय को लेकर पूर्व में भी भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) द्वारा कई बार ज्ञापन दिए गए, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब परीक्षा प्रभारी डॉ. पूर्णिमा शर्मा पर छात्रों को धमकाने, अभद्र व्यवहार करने और मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसे गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की संपूर्ण जिम्मेदारी एक ही अधिकारी के अधीन होने से पारदर्शिता समाप्त हो गई है और विश्वविद्यालय का शैक्षणिक व प्रशासनिक तंत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान परीक्षा प्रभारी के रहते न तो निष्पक्ष मूल्यांकन संभव है और न ही छात्रों के भविष्य की सुरक्षा। ऐसे में परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए परीक्षा प्रभारी को हटाना अनिवार्य हो गया है।
एनएसयूआई की प्रमुख मांगें
-परीक्षा परिणामों में भारी गड़बड़ी के लिए परीक्षा प्रभारी डॉ. पूर्णिमा शर्मा को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।
-सभी घोषित परीक्षा परिणामों का पुनर्मूल्यांकन कर शीघ्र सुधार कराया जाए।
-भविष्य में पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
इस दौरान कार्यक्रम में प्रमुख रूप से एनएसयूआई आशीष द्विवेदी, सिमरन कौर, शुभम सोंधिया, विश्वविद्यालय अध्यक्ष दीपांशु गुप्ता, महेंद्र यादव, शाहिल कुशवाह, ओम साहू, कान्हा गर्ग, राज केवट, शिवांशु साहू, शुभांक पांडेय, आशु सिंह, योगेश साहू, आयुष तिवारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही परीक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
Author: The Mukhbir
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