
–69वीं राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता का भव्य समापन, केरल बनी विजेता

The mukhbir शहडोल। 69वीं राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता का शहडोल में सफल आयोजन न केवल खेल उत्कृष्टता का प्रतीक बना, बल्कि इसने शहडोल की संस्कृति, मेहमाननवाज़ी और आत्मीयता को भी पूरे देश के सामने उजागर किया। देशभर से आए खिलाड़ियों, कोचों और टीम प्रबंधकों ने शहडोल के स्वागत, व्यवस्थाओं और अपनत्व की खुले दिल से सराहना करते हुए इसे अविस्मरणीय अनुभव बताया।
महात्मा गांधी स्टेडियम में आयोजित समापन समारोह में मुख्य अतिथि पं. शंभूनाथ शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. रामाशंकर ने कहा कि खेल प्रतिस्पर्धा में जीत-हार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण आपसी सम्मान, भाई-चारा और नियमों का पालन है। यही भारतीय खेल संस्कृति की सच्ची पहचान है। उन्होंने कहा कि शहडोल की धरती पर यह आयोजन खेल, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता का सुंदर संगम बनकर उभरा है। कोचों की सराहना बनी शहडोल की पहचान
कुलगुरु प्रो. रामाशंकर ने कहा कि देशभर से आए कोचों और टीम प्रबंधकों द्वारा की गई सराहना यह दर्शाती है कि जिले के अधिकारियों, कर्मचारियों एवं स्वयंसेवकों ने अपने दायित्वों का निर्वहन आत्मीयता और जिम्मेदारी के साथ किया। उन्होंने विजेता-उपविजेता टीमों सहित सभी राज्यों से आए खिलाड़ियों और कोचों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
समापन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. रामाशंकर, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल, उपाध्यक्ष जिला पंचायत सहित अन्य जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ किया गया।

हार-जीत से ऊपर खेल भावना : घनश्याम
नगर पालिका अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल ने खिलाड़ियों और अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि शहडोल की पावन धरा पर पधारने के लिए सभी का हार्दिक आभार। उन्होंने कहा कि खेल में हार-जीत अंतिम नहीं होती, बल्कि अनुशासन, धैर्य और स्वस्थ जीवन की सीख खेलों की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
कोचों ने साझा किए आत्मीय अनुभव
समारोह में विभिन्न राज्यों से आए टीम प्रबंधकों ने शहडोल के अनुभव साझा किए. सुनील कुमार (चंडीगढ़) ने कहा कि शहडोल आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। यहां के लोगों का सरल स्वभाव और शांति उन्हें हमेशा याद रहेगी।
भीम सेन (जम्मू-कश्मीर) ने कहा कि प्रारंभ में शहडोल आने को लेकर संकोच था, लेकिन यहां पहुंचते ही अपनापन महसूस हुआ। चार दिन कैसे बीत गए, पता ही नहीं चला।
प्रियंका कुमारी (झारखंड) ने कहा कि यहां के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाएं, रहने, भोजन और अन्य सुविधाएं, हमेशा स्मृतियों में रहेंगी।
फाइनल मुकाबले में केरल का परचम
राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में केरल और महाराष्ट्र की टीमें आमने-सामने रहीं। रोमांचक मुकाबले में केरल टीम ने अनुशासित खेल, सटीक रणनीति और बेहतरीन टीमवर्क का प्रदर्शन करते हुए विजय हासिल की। दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने दर्शकों को रोमांच से भर दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. रामाशंकर, कलेक्टर डॉ. केदार सिंह एवं उपस्थित जनप्रतिनिधियों द्वारा विजेता, उपविजेता और अन्य टीमों के खिलाड़ियों एवं कोचों को शील्ड, मेडल एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया समापन की शोभा
समापन अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा खेल ध्वज का अवतरण किया गया, जो प्रतियोगिता के सफल समापन का प्रतीक बना।
30 टीमों के 358 खिलाड़ियों ने दिखाया हुनर
उल्लेखनीय है कि 19 से 23 दिसंबर तक आयोजित 69वीं राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता में देशभर से 30 टीमों के 358 खिलाड़ी शामिल हुए। आंध्रप्रदेश, बिहार, सीबीएसई, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों एवं संस्थाओं की टीमों ने अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया।
प्रतियोगिताएं महात्मा गांधी स्टेडियम, डाइट परिसर, गुड शेफर्ड कॉन्वेंट, एवं शासकीय इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय परिसर में प्रातः 7 बजे एवं सायं 3 बजे से आयोजित की गईं।
समापन कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती हीरावती कोल, संयुक्त संचालक खेल उमेश कुमार धुर्वे, जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपाची, सहायक आयुक्त आनंद राय सिंहा, डीपीसी अमरनाथ सिंह, सहायक संचालक खेल रईस अहमद, एपीसी अरविंद पाण्डेय, कोच, पत्रकारबंधु, खिलाड़ी एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन विवेक पाण्डेय एवं अरुणिमा सिंह ने किया।
Author: The Mukhbir
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