The mukhbir राहुल सिंह राणा शहडोल। सोशल मीडिया पर इन दिनों जो ऑडियो आग की तरह फैल रहा है, वह सिर्फ एक बातचीत नहीं बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक चाल का संकेत देता है। लगभग 29 मिनट 35 सेकंड का यह वायरल ऑडियो जिस तरीके से सामने आया है, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किसने रिकॉर्ड किया..? क्यों रिकॉर्ड किया..? और किसे फंसाने के लिए किया गया…?
यह ऑडियो बर्खास्त सीएमओ व वर्तमान भाजपा नेता रविकरण त्रिपाठी और पूर्व सोहागपुर मंडल महामंत्री राजेंद्र गौतम (बबलू भैया) के बीच बातचीत का बताया जा रहा है। लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि यह कोई साधारण बातचीत नहीं, बल्कि पूरी तरह सुनियोजित रिकॉर्डिंग प्रतीत होती है।
खुद सवाल, खुद सहमति और फिर वायरल
ऑडियो को ध्यान से सुनने पर साफ पता चलता है कि सवाल भी बेहद सोच-समझकर पूछे गए हैं और जवाबों में भी कहीं न कहीं सहमति का माहौल बनाया गया है। यही नहीं, बातचीत के दौरान भोपाल आने-जाने, किसके साथ मुलाकात हुई, किससे क्या चर्चा हुई. हर बिंदु पर प्रमाण मांगने जैसी रणनीति अपनाई गई है।
कुछ देर बाद ऑडियो में आवाज़ धीमी हो जाती है और फिर एक महिला की आवाज़ सामने आती है, जो सवालों के जवाब देती सुनाई देती है। अब यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह महिला कौन थी..?
किस वजह से वह सवालों के जवाब दे रही थी..?
इस बात की पुष्टि सिर्फ और सिर्फ रविकरण त्रिपाठी ही कर सकते हैं कि उनके सामने मौजूद महिला कौन थीं।
भाजपा जिला अध्यक्ष को घेरने की कोशिश
इस ऑडियो के जरिए आरोप लगाए जा रहे हैं कि भाजपा जिला अध्यक्ष श्रीमती अमिता चपरा ने जयसिंहनगर विधायक श्रीमती मनीष सिंह एवं अन्य नेताओं के बारे में कथित तौर पर अनर्गल बातचीत की। लेकिन यहां भी एक गंभीर विरोधाभास सामने आता है।
अगर ऑडियो वास्तव में भाजपा जिला अध्यक्ष से जुड़ा है, तो बातचीत रविकरण त्रिपाठी और राजेंद्र गौतम के बीच क्यों हो रही है।
जिला अध्यक्ष के खुद के मोबाइल से बातचीत में क्यों नहीं हैं.
तीसरे व्यक्ति (महिला आवाज) की एंट्री कैसे हुई.
यही वजह है कि यह पूरा मामला जांच के दायरे में आता है और इसे यूं ही सच मान लेना न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि खतरनाक भी।
The mukhbir. com इस वायरल ऑडियो की पुष्टि नहीं करता। यह साफ तौर पर कहा जाता है कि इस ऑडियो में कौन-कौन शामिल हैं,
किस उद्देश्य से इसे रिकॉर्ड किया गया,
और इसे वायरल कराने के पीछे किसकी मंशा है
इन सबकी सत्यता की पुष्टि होना अभी बाकी है।
सवाल बहुत हैं, जवाब नहीं
यह वायरल ऑडियो सच कम और राजनीतिक हथकंडा ज्यादा लगता है। यह किसी व्यक्ति या पद को बदनाम करने की कोशिश है या फिर अंदरूनी गुटबाजी का परिणाम यह जांच का विषय है।
जब तक तथ्यों की पुष्टि नहीं होती, तब तक किसी भी व्यक्ति की छवि पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सच सामने आएगा…पर उससे पहले ज़रूरी है कि अफवाह और तथ्य के बीच का फर्क समझा जाए।
Author: The Mukhbir
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