“एक साल से ओटी नर्सिंग स्टाफ पर मानसिक अत्याचार, शिकायतें बनी कूड़ेदान की शोभा”
The mukhbir शहडोल। आदिवासी बहुल संभागीय मुख्यालय का सरकारी अस्पताल आज इलाज से ज़्यादा डर, दबाव और दमन के लिए चर्चा में है। जहां मरीजों की जान बचाने की कसम ली जाती है, वहीं ऑपरेशन थिएटर में महिला नर्सिंग स्टाफ की गरिमा तार-तार की जा रही है। हैरानी यह कि लिखित शिकायतें, मौखिक गुहार और उच्च अधिकारियों तक पहुंच, सब कुछ होने के बावजूद न्याय शून्य है।
अफसरों की चौकड़ी, पर कार्रवाई भी नहीं
सूत्रों के मुताबिक अस्पताल में एक सर्जन सहित तीन अफसरों की चौकड़ी का दबदबा बीते कई सालो से कायम है। परिणाम यह कि प्रताड़ना झेल रही नर्सों को राहत देने के बजाय ऑपरेशन थिएटर से हटाकर अन्य वार्डों में भेज दिया गया, मानो अपराधी वही हों।
क्या है पूरा मामला
जिला अस्पताल शहडोल के ऑपरेशन थिएटर में पदस्थ नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव और पूजा खटीक ने 27 नवंबर 2025 को जिला दंडाधिकारी शहडोल (कलेक्टर शहडोल) को लिखित शिकायत सौंपी। शिकायत में मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजा शीतलानी (मूल पदस्थापना-सीएचसी जयसिंहनगर, वर्तमान संलग्न-जिला अस्पताल शहडोल, सर्जरी विभाग) पर अमर्यादित भाषा, धमकी, मानसिक प्रताड़ना और अनुचित फेवर की मांग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नर्सों का कहना है कि वे खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं, फिर भी शिकायतों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ऑपरेशन थिएटर में अभद्रता के आरोप
शिकायत के अनुसार, ओटी में पदस्थ एक नर्स को सार्वजनिक रूप से आपत्तिजनक संबोधन और अश्लील टिप्पणियां की जाती हैं। आरोप यह भी है कि इसी तरह का अनुचित फेवर अन्य नर्सों से भी अपेक्षित किया गया, जिससे उन्हें बार-बार शर्मिंदगी और मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
कार्यकुशलता पर बेबुनियाद सवाल, खुलेआम धमकी, नर्सिंग ऑफिसरों ने बताया कि वे वर्षों से सीनियर सर्जनों के साथ नियमित ऑपरेशन कराती रही हैं और कभी कार्यकुशलता पर सवाल नहीं उठा। इसके बावजूद आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उन्हें झिड़कना, इंस्ट्रूमेंट खराब बताना और ओटी से बाहर निकालने की धमकी दी जाती रही। कई बार उन्हें हटाकर पसंदीदा नर्स को बुलाया गया।
शिकायत का नतीजा, पीड़ितों पर ही वार
25 नवंबर 2025 को आर.एम.ओ. डॉ. पुनीत श्रीवास्तव द्वारा नर्सों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नर्सों का आरोप है कि यह कदम डॉ. राजा शीतलानी के इशारे पर उठाया गया। बातचीत में कथित तौर पर कहा गया
“राजा साहब को पटाकर रखो, कोई परेशानी नहीं होगी।”
नर्सिंग स्टाफ ने इसे घोर आपत्तिजनक और मानसिक उत्पीड़न करार दिया है।
शिकायतें कई स्तरों पर, फिर भी सन्नाटा
29 नवंबर को पीड़ित नर्सों ने कलेक्टर शहडोल, क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं (रीवा संभाग), सिविल सर्जन, महिला थाना और आजाक थाना तक शिकायत की। इसके जवाब में प्रताड़ित करने वाले पक्ष की शिकायत पर पीड़ित नर्सों को ही शोकॉज थमा दिया गया—वह भी ऐसे अधिकारी द्वारा, जिन्हें नोटिस जारी करने का अधिकार तक नहीं था।
सवाल: क्या यह प्रशासनिक प्रक्रिया है या प्रभाव का खुला खेल…
सिर्फ नर्सें नहीं, डॉक्टर भी परेशान
डॉ. राजा शीतलानी की मूल पदस्थापना सीएचसी जयसिंहनगर में है, फिर भी प्रभाव के चलते एक साल से जिला अस्पताल में सेवाएं ली जा रही हैं। उनकी कथित अभद्रता से नर्सें ही नहीं, चिकित्सक भी त्रस्त हैं। 28 जून 2025 को डॉ. अपूर्व पांडेय, डॉ. अरविंद अम्बेडकर और डॉ. व्ही.पी. पटेल ने लिखित शिकायत दी। लेकिन कोई अंकुश नहीं।
ओ.टी. से हटाईं नर्सें, मरीज भुगत रहे खामियाजा
प्रताड़ना झेल रहीं रश्मि राव और पूजा खटीक को ओटी से हटाकर अन्य वार्डों में पदस्थ कर दिया गया। इसका सीधा असर ऑपरेशन व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर पड़ा, सर्जनों को प्रशिक्षित स्टाफ की कमी झेलनी पड़ी।
-क्या सरकारी अस्पताल में महिला कर्मियों की गरिमा सुरक्षित है।
-क्या शिकायत करना ही सजा बन चुका है।
क्या प्रभावशाली अफसरों के सामने प्रशासन बेबस है।
मांग स्पष्ट है..उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच; दोषियों पर कठोर कार्रवाई; और पीड़ित नर्सों की तत्काल सुरक्षा।
क्योंकि अगर अस्पताल में ही न्याय मर गया, तो इलाज किससे उम्मीद करेगा।
The mukhbir से जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा कि रिपोर्ट…
Author: The Mukhbir
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