April 17, 2026 7:21 pm

सच सीधा आप तक

रोज़गार से धोखा, सब्र का इम्तिहान खत्म…

श्री राजपूत करणी सेना का प्रशासन को अल्टीमेटम..7 दिन में समाधान नहीं तो होगा उग्र आंदोलन…

The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। औद्योगिक विकास के नाम पर स्थानीय युवाओं के भविष्य से खुला खिलवाड़ अब बर्दाश्त के बाहर हो चुका है। सोहागपुर क्षेत्र की अमलाई ओसीएम में कोयला उत्पादन और ओबी खनन कार्य शुरू हुए महीनों बीत गए, मगर स्थानीय युवाओं को रोज़गार आज तक नहीं। कागज़ों में वादे, ज़मीनी हकीकत में बहाने यही इस सिस्टम की पहचान बनती जा रही है।
इसी अन्याय के खिलाफ श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश प्रताप सिंह ‘दादू’ एवं प्रदेश मंत्री देवी सिंह सेंगर के नेतृत्व में स्थानीय युवाओं ने कलेक्टर शहडोल सहित केंद्रीय श्रम आयुक्त, महाप्रबंधक एस.ई.सी.एल. सोहागपुर, अनुविभागीय अधिकारी जैतपुर, तहसीलदार बुढार, उप क्षेत्रीय प्रबंधक अमलाई ओ. सी. एम., थाना प्रभारी धनपुरी एवं अमलाई व मेसर्स आर.के.टी.सी. कंपनी प्रबंधन को धारदार चेतावनी भरा ज्ञापन सौंपते हुए 7 दिन का अल्टीमेटम दे डाला।

वादे पूरे, रोज़गार शून्य

ज्ञापन में साफ लिखा है कि अमलाई ओ.सीएम में खनन कार्य के लिए आर. के. टी. सी. कंपनी को ज़िम्मेदारी दी गई, कार्य भी शुरू हो चुका, लेकिन स्थानीय ग्रामों के कुशल/अर्द्धकुशल बेरोज़गार युवाओं को काम देने की शर्तें धूल फांक रही हैं।
चयनित युवाओं के मेडिकल, वोकेशनल ट्रेनिंग सर्टिफिकेट और बी-फॉर्म तक जमा करा लिए गए. फिर भी न नौकरी, न जवाब।

बाहरी लोग, स्थानीय बेरोज़गार, नियमों की खुलेआम धज्जियाँ

सबसे गंभीर आरोप यह कि कंपनी द्वारा अन्य राज्यों या औद्योगिक प्रभावित क्षेत्र से बाहर के लोगों को काम पर रखा जा रहा है। यह न सिर्फ अनुचित, बल्कि कंपनी नियमों और सामाजिक समझौतों का सीधा उल्लंघन है।

सवाल उठता है…

क्या स्थानीय युवाओं का हक़ छीना जा रहा है,
क्या प्रशासन की आंखों के सामने नियम रौंदे जा रहे हैं, 7 दिन की आख़िरी मोहलत
श्री राजपूत करणी सेना ने साफ शब्दों में चेताया है. यदि 7 दिनों के भीतर स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिला और मांगों का स्पष्ट, लिखित समाधान नहीं हुआ, तो कंपनी के कार्यों में उत्पन्न होने वाले हर तरह के व्यवधान की पूरी ज़िम्मेदारी कंपनी प्रबंधन और प्रशासन की होगी।

सड़क से सदन तक संघर्ष तय

प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश प्रताप सिंह ‘दादू’ ने दो टूक कहा…
“यह सिर्फ रोज़गार का सवाल नहीं, यह सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। अगर प्रशासन मौन रहा, तो आंदोलन उग्र होगा।”

अब फैसला प्रशासन के हाथ में

एक तरफ कागज़ी विकास, दूसरी तरफ ज़मीनी बेरोज़गारी। अब देखना यह है कि प्रशासन 7 दिन में न्याय देता है या फिर शहडोल एक बड़े आंदोलन का गवाह बनने जा रहा है।
क्योंकि जब हक़ छीना जाता है। तो आवाज़ें सड़क पर उतरती हैं।
ज्ञापन देने के दौरान प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश प्रताप सिंह दादू, प्रदेश मंत्री देवी सिंह सेंगर, महेंद्र सिंह सेंगर, सचिन सिंह, आशिक सिंह, विक्रम प्रताप सिंह, चंडबली सिंह, अतुल सिंह और जतिन सिंह शामिल रहें।
The Mukhbir
Author: The Mukhbir

Toggle Dark Mode
error: Content is protected !!