April 17, 2026 6:00 pm

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नदना-खेतौली बना अवैध कोयला कारोबार का गढ़…


सोन नदी–घोसरों नाला के बीच “काले खेल” का खुला राज, प्रशासन मौन…

themukhbir.com कि स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट, शहडोल। रात का अंधेरा हो या दिन का उजाला… जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नदना-खतौली में सोन नदी और घोसरों नाला के बीचों-बीच ऐसा “काला कारोबार” पल रहा है, जो अब सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि खुलेआम चुनौती बन चुका है।
यहां अवैध कोयला कारोबार इस कदर बेखौफ होकर फल-फूल रहा है कि मानो शासन-प्रशासन की आंखों पर पट्टी बंधी हो… या फिर सबकुछ “सहमति” से चल रहा हो।

काला कोयला” नहीं… ये कानून के माथे पर तमाचा

ग्रामीणों और मुखबिर सूत्रों की मानें तो इस इलाके में अवैध उत्खनन कर कोयले को ट्रैक्टरों के जरिए ईट-भट्टो में सप्लाई किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह है कि परिवहन का रास्ता भी ऐसा चुना गया है, जहां निगरानी लगभग असंभव हो नदी-नालों के रास्ते, जंगल-कच्चे रास्ते, दिन-रात के समय लोडिंग-अनलोडिंग, बिना रॉयल्टी, बिना वैध परमिट यानी पूरा सिस्टम इस तरह सेट है कि अवैध कारोबारियों को रोकने वाला कोई नहीं, और रोकने वाला भी हो तो… रास्ता ही नहीं मिलता।

ट्रैक्टर बने “अवैध परिवहन” की धड़कन

नदना-खतौली में ट्रैक्टरों की आवाज अब खेती की पहचान नहीं रही… बल्कि यह आवाज बन चुकी है काले कारोबार की गवाही। मुखबिर सूत्र बताते हैं कि कोयला सप्लाई में कई ट्रैक्टर दिन-रात लगे रहते हैं और हर चक्कर के साथ…लाखों रुपये का खेल और कानून...वो शायद सिर्फ किताबों में रह गया है। प्रशासन मौन… सबसे बड़ा शक यहीं से जन्म लेता है. इतना बड़ा अवैध कारोबार, खुली आवाजाही, ट्रैक्टरों की कतारें, नदी-नालों से परिवहन, और फिर भी विभाग जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन मौन...ये मौन सामान्य नहीं है। यह मौन सवाल खड़ा करता है, और सवाल तलवार बनकर सच के गले तक पहुंचता है।

कमल और सोभनाथ” को किसका संरक्षण

स्थानीय चर्चा और मुखबिर सूत्रों के मुताबिक इस अवैध कारोबार के पीछे क्षेत्र के ही कमल और सोभनाथ के नाम तेजी से उभर रहे हैं।
अब सवाल यह नहीं कि कारोबार हो रहा है… सवाल यह है कि क्या इन लोगों को प्रशासन की मौन स्वीकृति मिल चुकी है। या फिर पर्दे के पीछे कोई “खास संरक्षण” चल रहा है।
क्योंकि यदि कार्रवाई नहीं हो रही तो दो ही स्थितियां संभव हैं. प्रशासन अक्षम है या प्रशासन सहमति/संरक्षण में है. और दोनों ही स्थितियां जनता के लिए खतरनाक हैं। नदी-नालों की छाती पर अवैध उत्खनन… पर्यावरण पर सीधा हमला।
इस अवैध कोयला उत्खनन से सिर्फ शासन को राजस्व का नुकसान नहीं हो रहा, बल्कि सोन नदी और घोसरों नाला क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है. पानी की धारा व किनारों का कटाव बढ़ रहा है. आसपास के गांवों में धूल-प्रदूषण, भविष्य में जल संकट का खतरा
यानी यह केवल अवैध खनन नहीं, पर्यावरण हत्या है।

कब टूटेगा प्रशासन का “मौन बम

आज सवाल ग्राम नदना-खतौली का है, कल ये आग पूरे जिले में फैल सकती है। यदि अभी भी प्रशासन ने आंखें बंद रखीं, तो यह “अवैध कोयला सिंडिकेट” इतना मजबूत हो जाएगा कि फिर कार्रवाई करना भी कठिन
और जनता को न्याय मिलना भी असंभव…
themukhbir.com और ग्रामीणों की मांग तुरंत जांच और सख्त कार्रवाई। अवैध उत्खनन स्थल पर तत्काल छापा, ट्रैक्टरों की जांच और जप्ती, संबंधित अफसरों की भूमिका की जांच, “कमल और सोभनाथ” सहित पूरे नेटवर्क पर कार्यवाही, अवैध परिवहन मार्गों पर स्थायी निगरानी, नदी-नालों के क्षेत्र में पर्यावरणीय जांच जनता पूछ रही है— “कानून किसके लिए” अगर गरीब ट्रैक्टर का टैक्स न भरे तो चालान कट जाता है,
लेकिन अगर नदी-नालों के बीचों-बीच लाखों का अवैध कोयला निकल रहा है तो कार्रवाई क्यों नहीं, किसका डर, हिस्सेदारी किसकी।
“नदना-खतौली में अवैध कोयला कारोबार नहीं, “सिस्टम की नाकामी” चल रही है
आज नदना-खतौली में जो हो रहा है, वह सिर्फ अवैध कारोबार नहीं है।”
अब देखना यह है कि प्रशासन “मौन” ही रहेगा, या फिर जनता के सामने जवाबदेही निभाएगा।
The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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