April 17, 2026 6:01 pm

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शहडोल में ‘नाबालिग गिरफ्तारी’ पर सियासी बवाल: लाठी, जेल और बयानबाज़ी से गरमाई राजनीति

पुष्पराजगढ़ विधायक फूंदेलाल सिंह ने कहां आज कलेक्टर यहा होते तो हम भी लाठी मारते…’
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। जिले में 12वीं के एक छात्र को हिरासत में लेकर जेल भेजने का मामला अब बड़ा राजनीतिक तूफान बन चुका है। कांग्रेस की ‘जन आक्रोश रैली’ और प्रशासन की कार्रवाई के बीच उठे इस विवाद ने सरकार और विपक्ष को आमने-सामने ला दिया है। आरोप-प्रत्यारोप, लाठीचार्ज और नाबालिग की गिरफ्तारी, इन सबने पूरे घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
बताया जा रहा है कि घटना के दौरान 17 साल 8 महीने के एक छात्र को भी पकड़ लिया गया। आरोप है कि मौके पर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने लाठी लेकर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। छात्र को धारा 151 के तहत वयस्क मानते हुए जेल भेज दिया गया। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ लिया।

विधायकों के तीखे बयान

पुष्पराजगढ़ विधायक फुंदेलाल सिंह मार्को ने मंच से कहा “अगर आज कलेक्टर यहां होते, तो हम भी लाठी मारते।”
वहीं बिछिया विधायक नारायण पट्टा ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कलेक्टरों को “लठैत” बना दिया गया है। इन बयानों के बाद सियासी तापमान और बढ़ गया।

कांग्रेस का हमला “2028 में होगा हिसाब”

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की अगुवाई में जयस्तंभ चौक से रैली निकली। आंबेडकर चौक पर माल्यार्पण के बाद सभा हुई, और फिर कलेक्ट्रेट तक मार्च कर ज्ञापन सौंपा गया। नेताओं ने मंच से चेतावनी दी कि 2028 में सत्ता परिवर्तन होने पर “चुन-चुन कर हिसाब” लिया जाएगा।

रैली के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा

जब पटवारी कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे तो कलेक्टर मौजूद नहीं मिले। ज्ञापन पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव, एडीएम सरोधन सिंह और जिला पंचायत सीईओ शिवम प्रजापति सहित अन्य अधिकारियों ने लिया।

हमें फायर फाइटर नहीं, माइक चाहिए”

मौके पर पटवारी ने एसपी के पीछे खड़े फायर फाइटर की ओर इशारा करते हुए कहा
हमें इसकी जरूरत नहीं है। आपके पास माइक हो, तो दिलवा दीजिए, ताकि संवाद में आसानी होगी।”
पुलिस ने माइक देने से इनकार किया तो कांग्रेस नेताओं ने खुद व्यवस्था की और बाद में मौजूद विधायकों व जिला अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपने भेज दिया।

दस्तावेज़ों में नाबालिग निकला था छात्र

जांच में छात्र की जन्मतिथि 22 मई 2008 पाई गई, जिससे वह नाबालिग निकला। लेकिन तब तक उसे बुढ़ार जेल भेजा जा चुका था। मंगलवार सुबह रिहा होने के कारण वह 12वीं बोर्ड की अंग्रेजी परीक्षा नहीं दे सका।
परिजनों का आरोप है कि यदि समय पर उम्र की जांच होती तो छात्र की परीक्षा नहीं छूटती।
वहीं एसपी रामजी श्रीवास्तव का कहना है कि गिरफ्तारी के समय बताई गई उम्र के आधार पर दस्तावेज तैयार किए गए थे। शहडोल जोन की आईजी के मुताबिक, उस समय उम्र स्पष्ट नहीं थी, बाद में नाबालिग होने की पुष्टि हुई।

क्या है पूरा मामला

8 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव धनपुरी कार्यक्रम के लिए शहडोल पहुंचे थे। गोपालपुर तिराहे पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाने की कोशिश की। हंगामे के बाद पुलिस ने करीब 40 लोगों को हिरासत में लिया, जिनमें उक्त छात्र भी शामिल था।
अब आगे क्या…पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
क्या नाबालिग की उम्र की पुष्टि में लापरवाही हुई.
क्या प्रशासन ने जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखाई.
और क्या इस मुद्दे पर सियासत और गरमाएगी.
फिलहाल, शहडोल की यह घटना प्रशासनिक कार्रवाई से ज्यादा राजनीतिक रणभूमि बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।
एक नाबालिग छात्र की गिरफ्तारी से शुरू हुआ विवाद अब सत्ता बनाम विपक्ष की सीधी लड़ाई में बदल चुका है। लाठी, बयान और चेतावनियों के बीच असली सवाल यही है. क्या जिम्मेदारी तय होगी, या मामला सिर्फ सियासी शोर बनकर रह जाएगा..?”

The mukhbir टीम शहडोल 

The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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