
The mukhbir महेंद्र सिंह पवार, धनपुरी-अमलाई। ओसीएम क्षेत्र में संचालित आर के टी सी कंपनी एक बार फिर विवादों के भंवर में फंसती दिख रही है। इस बार मामला सिर्फ एक नियुक्ति का नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय स्तर पर उठ रही आवाजें अब इतने तेज हो चुकी हैं कि कंपनी की कार्यशैली कठघरे में खड़ी नजर आ रही है।

स्थानीय मुखबिर सूत्रों के मुताबिक, 15 फरवरी को हुए कर्मचारी विवाद के दौरान कंपनी के पक्ष में बयान देने वाले श्रीकांत दाहिया के भाई को अचानक सुपरवाइजर पद पर बैठा दिया गया। चौपालों से लेकर चाय की दुकानों तक चर्चा गर्म है कि पहले हेल्पर पद की बात चल रही थी, लेकिन देखते ही देखते “मेहरबानी” का ऐसा चमत्कार हुआ कि कुर्सी सीधे सुपरवाइजर की मिल गई।
“सबसे बड़ा सवाल यही है… क्या यह योग्यता की जीत है या चापलूसी का इनाम”

युवाओं में उबाल, भरोसे पर चोट क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं में इस फैसले को लेकर जबरदस्त आक्रोश है। युवाओं का साफ कहना है कि यहां मेहनत, अनुभव और योग्यता की कीमत शून्य होती जा रही है, जबकि प्रबंधन की हां में हां मिलाने वालों के लिए दरवाजे चौड़े खुले हैं।
स्थानीय युवाओं का आरोप है कि कंपनी में “फूट डालो और शासन करो” की नीति पर काम हो रहा है, जिससे कर्मचारियों के बीच जानबूझकर विभाजन पैदा किया जा रहा है।
अंदरूनी खेल के आरोप
कर्मचारियों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि कुछ प्रभावशाली नाम शिवदत्त और रेड्डी आंतरिक खेमेबाजी को हवा देकर अपना वर्चस्व बनाए हुए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठते सवाल माहौल को और गर्म कर रहे हैं।
इतना ही नहीं, कंपनी पर यह गंभीर आरोप भी लग रहा है कि कथित दलालों और दबंग प्रवृत्ति के लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है। इससे आम कर्मचारी दबाव और भय के माहौल में काम करने को मजबूर हैं।
मामला पहुंचा थाने, बढ़ी सियासी गर्मी
हालिया विवाद का धनपुरी थाने तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि अंदरूनी असंतोष अब सतह पर आ चुका है। सूत्रों के अनुसार, कंपनी ने अपने हित साधने के लिए कुछ कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराने की पहल भी की, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी और भड़क गई है।
सबसे बड़ा सवाल, पारदर्शिता या ‘सेटिंग’
अब निगाहें एक ही सवाल पर टिक गई हैं:
क्या आर के टी सी में पदोन्नति का पैमाना योग्यता है या फिर ‘सेटिंग’, यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह सिर्फ कंपनी की साख पर धब्बा नहीं, बल्कि स्थानीय युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ माना जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी भी कठघरे में
पूरा मामला सामने आने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
क्या निष्पक्ष जांच होगी या फिर यह मामला रसूख और प्रभाव की धूल में दब जाएगा.
धनपुरी-अमलाई की जनता और बेरोजगार युवा अब जवाब का इंतजार कर रहे हैं. और यह इंतजार जितना लंबा होगा, गुस्सा उतना ही विस्फोटक हो सकता है।
The mukhbir टीम शहडोल
Author: The Mukhbir
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