April 17, 2026 6:02 pm

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जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ, बने देश के 53वें चीफ जस्टिस

 

The mukhbir नई दिल्ली। सोमवार को जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India, CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में पद की शपथ दिलाई। शपथ-समारोह में देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, साथ ही पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी मौजूद थे।


उनकी यात्रा और न्यायिक धरोहर

  • नियुक्ति: जस्टिस सूर्यकांत की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 124 (2) की शक्ति का उपयोग कर की गई।
  • पूर्व CJI: वे सीजेआई बी.आर. गवई की जगह ले रहे हैं, जिन्होंने 23 नवंबर को रिटायरमेंट लिया।
  • कार्यकाल: उनका मानना है कि उनका tenure लगभग 14 से 15 महीने का होगा. वे 9 फरवरी, 2027 तक CJI बने रहेंगे।
  • न्यायिक करियर: सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। उन्होंने लॉ की पढ़ाई की और बाद में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत की।
  • महत्वपूर्ण फैसले: अपने न्यायिक करियर में, उन्हें संवैधानिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते देखा गया है. जैसे कि अनुच्छेद 370 (जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति) मामले में उनकी हिस्सेदारी रही है।

अर्थ और महत्व

  • उनकी नियुक्ति की सरकार और न्यायपालिका दोनों द्वारा पारंपरागत प्रक्रिया का सम्मान करते हुए सिफारिश की गई थी।
  • शपथ-समारोह में अंतरराष्ट्रीय न्यायपालिका प्रतिनिधियों की भी मौजूदगी थी, जिससे यह समारोह केवल राष्ट्रीय नहीं, बल्कि न्यायिक कूटनीति की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना गया है।
  • उनकी न्यायिक शैली को न्याय में पारदर्शिता, संविधान और मौलिक अधिकारों पर भरोसा और संस्थागत जवाबदेही की भावना के रूप में देखा जाता है।

चुनौतियाँ और उम्मीदें

  • आने वाले महीनों में उनकी कार्य प्राथमिकताएँ में पेंडेंसी मामलों का निपटारा और मध्यस्थता को बढ़ावा देना शामिल हो सकता है।
  • उनके कार्यकाल में न्यायपालिका की स्वतंत्रता, तीव्रता और लीगल सुधारों पर निगाहें टिकी रहेंगी।
  • यह देखना दिलचस्प होगा कि वे संविधान के मूल मूल्यों और न्याय की पहुँच को कैसे आगे बढ़ाते हैं, खासकर युवा और वंचित वर्गों के लिए।

जस्टिस सूर्यकांत की शपथ ग्रहण देश के न्यायिक इतिहास में एक नया अध्याय है. जो उम्मीदों के साथ-साथ बड़ी ज़िम्मेदारियों को भी जोड़ता है। उनके नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की दिशा और उसकी प्राथमिकताएं आगे कैसे आकार लेंगी, यह आने वाले वक्त में स्पष्ट होगा।

The mukhbir टीम नई दिल्ली 

The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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