April 17, 2026 7:37 pm

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क्रिकेटर बनने का जज़्बा… रोज तय करती है 100 किमी का सफर 15 वर्षीय आशी


ट्रक ड्राइवर की बेटी का संघर्ष बना उदाहरण
The mukhbir राहुल सिंह राणा शहडोल। सपनों की कोई दूरी नहीं होती और अगर होती भी है, तो उसे मीलों की परवाह नहीं रहती। 15 वर्षीय आशी सोनी इसकी जीती-जागती मिसाल है। क्रिकेटर बनने का सपना लेकर वह रोज़ 100 किलोमीटर का सफर तय करती है। जयसिंहनगर के एक साधारण परिवार से निकलकर महान क्रिकेटर बनने की चाह ने उसे ऐसा संकल्प दिया है, जिसकी कहानी हर किसी को प्रेरित करती है।
मध्य प्रदेश का शहडोल महिला क्रिकेट की नर्सरी माना जाता है। यहां से निकलकर पूजा वस्त्रकार जैसी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी हैं। पूजा की सफलता ने जिले की दर्जनों बेटियों में क्रिकेट का जुनून जगाया है। इसी कड़ी में एक नाम है. आशी सोनी, जो अपने जज्बे, संघर्ष और कड़ी मेहनत से एक अलग पहचान बनाने की राह पर है।

रोज़ 100 किमी सफर… न थकान, न शिकायत

आशी पिछले ढाई वर्षों से जयसिंहनगर से शहडोल तक रोज़ 50-50 किमी का सफर तय कर रही है। सुबह 7 बजे घर से निकलकर प्रैक्टिस में हिस्सा लेना और शाम वापस लौटना. यह उसकी रोजमर्रा की दिनचर्या है। सुबह का सेशन और दोपहर के सेशन के लिए सुबह से घर से निकलकर रात 9 बजे पहुंचना पड़ता है।
रोज़ का खर्च 200 रुपये, लेकिन परिवार ने कभी “पैसे” को उसकी राह में रुकावट नहीं बनने दिया।

कैसे हुआ क्रिकेट से प्यार

आशी बताती है कि वह क्रिकेट के बारे में ज्यादा जानती भी नहीं थी, लेकिन कॉलेज ग्राउंड में हुए एक ट्रेनिंग सेशन ने उसकी जिंदगी बदल दी।
स्पोर्ट्स टीचर दिलीप शुक्ला और कोच प्रेम शंकर माली ने उसके टैलेंट को पहचाना और उसे शहडोल ट्रायल के लिए भेजा।
यहां कोच सोनू रॉबिंसन ने उसे देखकर तुरंत शहडोल क्रिकेट अकादमी ज्वाइन करने का सुझाव दिया और आशी ने बिना देर किए यह कदम उठा लिया।
आज वह राइट हैंड बैट्समैन और स्पिन बॉलर के रूप में लगातार बेहतर खेल दिखा रही है।
वह अंडर-15 डिवीजन टीम में खेल चुकी है और एमपी बोर्ड का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी है।

परिवार ने कहा “पैसा कभी रुकावट नहीं बनेगा”

ट्रक ड्राइवर पिता और हाउसवाइफ मां की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है, लेकिन सपने मजबूत हैं। आशी की बड़ी बहन खुशी सोनी पार्ट टाइम नौकरी करती हैं ताकि छोटी बहन का सपना टूटने न पाए।
खुशी का कहना है….
आशी ने कहा क्रिकेट खेलना है, तो हमने कहा जाओ। हमने कभी उसे रोका नहीं, और उसके कोच ने जिस दिन कहा कि वह टैलेंटेड है, उसी दिन तय कर लिया कि पैसा रुकावट नहीं बनेगा। एक दिन वह इंडिया टीम में जरूर खेलेगी।”

कोच भी मानते हैं “यह लड़की बहुत आगे जाएगी”

शहडोल क्रिकेट अकादमी के कोच कहते हैं.
“आशी पहली बार अपनी बहन के साथ आई थी। मैंने पूछा कि रोज़ 100 किमी आना-जाना कैसे करोगी..? तो बोली मैनेज कर लेंगे। उसके यही आत्मविश्वास ने मुझे प्रभावित किया। दो साल के अभ्यास में ही वह एमपी अंडर-16 ट्रायल में सिलेक्ट हो गई। उसका खेल अलग है, टैलेंट गजब का है। वह बड़े स्तर की खिलाड़ी बनेगी।”

रोल मॉडल, पूजा वस्त्रकार और पूनम सोनी

आशी पूनम सोनी और पूजा वस्त्रकार को अपना प्रेरणा स्रोत मानती है। जैसे पूनम सोनी कभी चचाई से रोज़ 65 किमी सफर कर शहडोल आती थीं, वैसे ही आशी आज 100 किमी की दूरी तय करके अपनी नींव मजबूत कर रही है।
वह चाहती है कि आने वाले एक-दो सालों में उसका खेल उस स्तर तक पहुंचे, जहां से इंडिया टीम की राह साफ नजर आए।

एक दिन भारतीय टीम की जर्सी पहनने का सपना

आशी हर दिन कड़ी मेहनत करके खुद को बेहतर बना रही है। उसका संघर्ष, उसकी मेहनत और उसका जज्बा बता रहा है.
यह लड़की बड़ी बनेगी… बहुत बड़ी।
जब एक ट्रक ड्राइवर की बेटी रोज़ 100 किमी सफर करके भी मुस्कुराते हुए मैदान पर पहुंचती हो, तो समझिए कि वह क्रिकेट नहीं, इतिहास बनाने जा रही है।

The mukhbir से जितेंद्र विश्वकर्मा की रिपोर्ट
The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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