April 17, 2026 7:21 pm

सच सीधा आप तक

रेत ठेकेदार बाबा महाकाल मिनरल्स का तांडव…

 

-बाबा महाकाल मिनरल्स पर गंभीर आरोप…
-सरकार को रोज़ लाखों का नुकसान, प्रशासन मौन क्यों..
The mukhbir राहुल सिंह राणा, उमरिया।
उमरिया जिले में रेत ठेकेदार-माफिया का खेल अब “संगठित अपराध” की शक्ल लेता दिख रहा है। बाबा महाकाल मिनरल्स पर अवैध उत्खनन, ओवरलोडिंग, फर्जी रसीद और बंद खदानों से रेत निकालने जैसे गंभीर आरोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल… क्या जिले में रेत का कारोबार कानून से चलता है या ठेकेदारों-माफियाओं की मनमानी से..?

खदान बंद, लेकिन रसीदें (रॉयल्टी) चालू…

गोवर्दे टीपी का खेल क्या है….
मानपुर जनपद की गोवर्दे सोन नदी रेत खदान जून 2024 से बंद पड़ी है, लेकिन आश्चर्य यह कि बंद टीपी से प्रतिदिन रसीदें धड़ाधड़ कट रही हैं!
आरोप है कि
  • रेत अमिलिया खदान से लोड होती है,
  • 15 किमी दूर गोवर्दे की बंद टीपी से फर्जी रसीद काटी जाती है,
  • और उसके बाद डंपर पूरी वैधता का नकली कवच पहनकर जिले से बाहर निकल जाते हैं।
ब्यौहारी-रीवा रूट पर रोज़ सैकड़ों डंपर खुलेआम निकलते हैं। अगर खदान बंद है,
अगर टीपी बंद है… तो रसीदें (रॉयल्टी) खुली कैसे हैं.
यह सबसे बड़ा सवाल जिले की जनता प्रशासन और सरकार से पूछ रही है।

अवैध उत्खनन बेखौफ…

क्या जिम्मेदारों की आंखों पर नोटों की पट्टी बंधी है.
नदी किनारे दिनभर पोकलैंड और जेसीबी गरजती हैं, रात में डंपरो की लंबी कतारों में निकलते हैं,
और जिले का पूरा तंत्र साइलेंट मोड में दिखाई देता है।
स्थानीय लोगों का आरोप साफ है.
“या तो दबाव है, या फिर ऊपर तक सेटिंग है।”
कई महीनों से दर्जनों शिकायतें खनिज विभाग, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक पहुंच चुकी हैं…
लेकिन कार्रवाई…. शून्य
सिर्फ ‘हम देख रहे हैं’ वाला रटा-रटाया जवाब।

अधिकारियों का जवाब…
या तो ‘नेटवर्क प्रॉब्लम’ या खामोशी
जब जिला खनिज अधिकारी से पूछा गया, जवाब आया
“मैं अभी दिखवाता हूं।”
खनिज निरीक्षक को फोन किया गया…
लेकिन उधर सिर्फ रिंगटोन, जवाब नहीं।
क्या इतने बड़े अवैध कारोबार पर अधिकारियों का यही स्तर है.

सरकार को करोड़ों का नुकसान, जनता की जेब पर भारी मार

अवैध उत्खनन का सीधा असर
  • सरकारी राजस्व की रोज़ लाखों की हानि
  • रेत के दाम दोगुना
  • निर्माण कार्य ठप
  • आम जनता परेशान
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बोझ
जिले में रेत की कीमतें इतने बढ़ गई हैं कि गरीब आदमी के लिए मकान का सपना और दूर हो गया है।

अब जनता के तेवर

अगर खदान बंद है, तो रसीदें चल कैसे रही हैं. अगर नियम हैं, तो टूट क्यों रहे हैं.
अगर प्रशासन है, सोया हुआ क्यों है… जाग क्यों नहीं रहा.
उमरिया में रेत का खेल अब नियमकानून नहीं, कमाई तय कर रही है।
जब तक जिम्मेदार विभाग कागज़ी कार्रवाई छोड़कर मैदान में उतरकर कार्रवाई नहीं करेगा,
तब तक जिले की नदी भी छलनी होगी और जनता की जेब भी।

The mukhbir से जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा 
The Mukhbir
Author: The Mukhbir

Toggle Dark Mode
error: Content is protected !!