फर्जी बिलों, भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का चौंकाने वाला खेल
The mukhbir राहुल सिंह राणा -शहडोल। ज़िले में शिक्षा विभाग से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित फर्जी बिल घोटाले ने पूरे प्रशासनिक तंत्र और जिले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतों, दस्तावेज़ों और RTI से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह पूरा प्रकरण जिले के इतिहास का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला बताया जा रहा है, जिसमें ठेकेदारों, अधिकारियों और शिक्षा विभाग के भीतर गहरी साठगांठ के आरोप सामने आए हैं।

फर्जी बिलों से करोड़ों का भुगतान, सालों तक चला खेल
शिकायत में आरोप है प्रभारी शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपाची, अरविंद कुमार पांडे ए.पी.सी. (राष्ट्रीय शिक्षा मिशन) और तत्कालीन लेखाधिकारी संतोष कुमार मिश्रा ने वर्ष 2022 से 2025 के बीच शिक्षा विभाग में पेंटिंग, मरम्मत और निर्माण कार्यों के नाम पर लाखों की राशि का फर्जी बिल बनाकर जारी कर दी गई। शिकायत-पत्र में ₹54 लाख, ₹15 लाख और ₹86,000 रुपये के कई आदेशों का उल्लेख दस्तावेज़ों में दर्ज है।
सुधाकर कंस्ट्रक्शन नामक फर्म को अकेले ₹ 59,93,004 का भुगतान मात्र चार माह में किए जाने का आरोप सामने आया है। कई स्कूलों में किए गए कार्यों का वास्तविकता से कोई मेल नहीं मिला कहीं 20 लीटर पेंट को 275 मजदूर दिखाया गया तो कहीं छोटे-मोटे काम को लाखों में भुगतान किया गया।
RTI, मीडिया रिपोर्ट्स और सामाजिक खुलासे
कई समाचार पत्रों व कई मीडिया चैनलों ने भी इन अनियमितताओं पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
RTI के जरिए खुलासा हुआ कि भुगतान बिना निविदा, बिना स्वीकृति और बिना GST के किया गया। इतना ही नहीं कई बिलों को अलग-अलग वाउचर में विभाजित कर मामले को छिपाने की कोशिश की गई।

शिकायतों में उठे गंभीर आरोप
शिकायत-पत्र में यह आरोप भी दर्ज है कि कुछ अधिकारियों ने फर्जी बिलों का बड़ा हिस्सा वापस लेकर ऊपर तक पहुंचाया। स्कूलों से जुड़े वास्तविक कार्य या तो हुए ही नहीं या फिर कागजों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए। कई स्कूलों में मामूली काम के बदले 5-6 लाख रुपये तक के बिल पारित किए गए। कई फर्मों के जरिए एक ही महीने में 24 लाख से अधिक की राशि भुगतान होने के आरोप हैं। एक ही प्रकार के काम के नाम पर अलग-अलग फर्म बनाकर करोड़ों रुपये निकालने का पैटर्न शिकायत में शामिल है।
ट्रांसफर, दबाव और दुरुपयोग के आरोप
शिकायत-पत्र में यह भी उल्लेख है कि अधिकारियों ने अपने प्रभाव का उपयोग कर चुनिंदा शिक्षकों और कर्मचारियों के मनचाहे स्थानांतरण करवाए। जो व्यक्ति अनियमितताओं पर आवाज़ उठाता, उसे प्रताड़ित किया गया।विभागीय कर्मचारियों पर दबाव डालकर फर्जी बिलों को पास करवाने का वातावरण तैयार किया गया।
प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग
पूरे घोटाले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता जिला विकास समन्वयक एवं निगरानी समिति सदस्य (दिशा) लक्ष्मण गुप्ता ने संभागीय आयुक्त, शिक्षा विभाग, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
उनका कहना है कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था के संसाधनों की लूट का है. जो सीधे बच्चों की शिक्षा और सुविधाओं को प्रभावित करता है।
शहडोल का यह कथित बड़ा घोटाला केवल फर्जी बिलों का मामला नहीं है; यह पूरे तंत्र में फैली अनियमितताओं, लापरवाही और मिलीभगत का एक चौंकाने वाला उदाहरण है। अब निगाहें इस पर हैं कि उच्च अधिकारी शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और सच्चाई कब सामने आती है।
फर्जीवाड़े की जांच तेज, जिला पंचायत ने बनाई विशेष टीम

शिक्षा विभाग से जुड़े एक गंभीर मामले में अब जिला प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया है। हाल ही में जिला पंचायत शहडोल द्वारा जारी आदेश के अनुसार स्कूल शिक्षा विभाग में फर्जी नियुक्तियों एवं वित्तीय अनियमितताओं के संदेह को देखते हुए एक विशेष जांच टीम गठित की गई है। यह कार्रवाई आयुक्त, लोक शिक्षा संचालनालय भोपाल से प्राप्त निर्देशों एवं पूर्व में भेजे गए आवेदन/शिकायतों के आधार पर की गई है।
जारी आदेश में उल्लेख है कि शिक्षकों की नियुक्ति तथा विद्यालयों में पदस्थापना संबंधी दस्तावेजों में गंभीर अनियमितता की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों की सत्यता की पुष्टि किए बिना वेतन आहरण जैसी प्रक्रियाओं में गड़बड़ी किए जाने की आशंका जताई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत जांच के निर्देश दिए हैं।
जांच टीम में एम.पी. सिंह (अति. मुख्य कार्यपालन अधिकारी), सुबोध मेहता (वरिष्ठ लिपिक), एवं अमरनाथ सिंह (जिला परियोजना समन्वयक) को शामिल किया गया है। यह टीम समस्त संबंधित अभिलेखों की जांच कर अपनी रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में प्रस्तुत करेगी।
जिला पंचायत सी.ई.ओ. ने स्पष्ट कहा है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस कदम को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
The mukhbir टीम शहडोल
Author: The Mukhbir
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