खाद्य विभाग के उड़नदस्ते की धड़कन बढ़ा देने वाली कार्रवाई में चौंकाने वाले खुलासे
The mukhbir राहुल सिंह राणा-उमरिया। जिले ताला-बांधवगढ़ नेशनल पार्क में शुक्रवार का दिन खाद्य सुरक्षा तंत्र के लिए किसी चेतावनी की घंटी जैसा साबित हुआ। खाद्य सुरक्षा उड़नदस्ते की टीम ने दो हाई-प्रोफाइल रिसोर्ट्स ओलिव होटल एंड रिसोर्ट और धरोहर कोठी में दबिश देकर जो सच उजागर किया, उसने पर्यटन उद्योग के चमकदार चेहरे के पीछे छिपे खतरनाक अंधेरों को सतह पर ला दिया।
प्रसिद्धि की चकाचौंध और आलीशान माहौल के बीच इन रिसोर्ट्स की रसोई वही कहानी कह रही थीं, जिससे हर वह व्यक्ति डरता है जो बाहर का भोजन विश्वास से खाता है।
ओलिव रिसोर्ट, जहाँ खाना नहीं, खतरा परोसा जा रहा था
जांच की शुरुआत ओलिव होटल एंड रिसोर्ट से हुई, जहाँ टीम ने ऐसा कॉर्न फ्लोर बरामद किया जिसका उपयोग आमतौर पर कपड़ों में कलफ लगाने के लिए किया जाता है. खाने के लिए नहीं। यह अखाद्य सामग्री चाइनीज व्यंजनों में मिलाकर ग्राहकों को परोसी जा रही थी।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जबरदस्त स्वास्थ्य जोखिम है।
इसके अलावा, फ्रिज में खुलेआम कॉकरोच चलते हुए मिले, जो साफ़-सफाई के स्तर का वह काला सच है जिसे होटल प्रबंधन चमकदार टेबलों और मोहक रोशनी के पीछे छिपाने की कोशिश कर रहा था।
उड़नदस्ते की टीम ने मौके से सभी संदिग्ध सामग्री जब्त कर ली और संचालक पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी।

धरोहर कोठी: सरकारी ‘अमृत’ गरीबों का हक, रिसोर्ट में किया जा रहा था दुरुपयोग
इसके बाद जांच पहुँची धरोहर कोठी, और यहाँ जो सामने आया उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र को हिलाकर रख दिया।
रेस्टोरेंट में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गरीब परिवारों को मुफ्त वितरित किए जाने वाला ‘अमृत नमक’ बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा था।
सरकारी योजना का नमक, अमीर ग्राहकों की थालियों में यह न सिर्फ अपराध है बल्कि गरीबों के अधिकारों की खुली लूट भी है।
टीम ने ऐसे 32 पैकेट मौके से जब्त किए, जो अपने आप में बड़े स्तर पर अनियमितता का संकेत है। इसके साथ ही, संचालक के पास अनिवार्य FSSAI लाइसेंस भी नहीं मिला। जो रजिस्ट्रेशन उपलब्ध था, वह सिर्फ छोटे स्तर के खाद्य कारोबारियों के लिए मान्य है।
जांच के दौरान मैनेजर अमित शुक्ला ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर काटकर और सहयोग न करके स्थिति को और गंभीर बना दिया।
कानून का शिकंजा कस चुका
संचालक जयवर्धन कुरोथे और मैनेजर अमित शुक्ला दोनों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
टीम का स्पष्ट संदेश है. स्वच्छ और सुरक्षित भोजन पर कोई समझौता नहीं, और ऐसी कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
उमरिया जिले के बांधवगढ़ नेशनल पार्क के इन चार घटनाओं ने साबित कर दिया कि आलीशान इमारतें और आकर्षक मेन्यू, सुरक्षित भोजन की गारंटी नहीं। पर्यटन और होटल व्यवसाय में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कुछ संचालक कानून, नैतिकता और उपभोक्ता के स्वास्थ्य तीनों को ताक पर रखकर सिर्फ मुनाफे का खेल खेल रहे हैं।
यह कार्रवाई सिर्फ छापा नहीं, बल्कि जागरुकता और सुधार का अलार्म है, जिसे न केवल होटल संचालकों बल्कि हर ग्राहक को सुनना होगा।
The mukhbir टीम
Author: The Mukhbir
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