
“शहडोल में सर्वेयरों से वसूली का खेल बेनकाब, आर. बी. एसोसिएशन ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजर मयूर जैन सुपरवाइजर शुभम गुप्ता व शिवम गुप्ता पर गंभीर आरोप…”
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। जिले में धान गुणवत्ता परीक्षण (सर्वेयर सिस्टम) के नाम पर चल रहा भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क अब खुलेआम सामने आ गया है।
आर. बी. एसोसिएशन ग्लोबल कनेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के सुपरवाइजर शुभम गुप्ता व सर्वेयर रामभजन खंनौधी धान खरीदी केंद्र का एक ऑडियो वायरल हो रहा है, जिसमें जिले के सर्वेयरों से रुपयों की मांग की जा रही हैं। ऑडियो में ₹10,000 से ₹20,000 प्रति सर्वेयर कमीशन की मांग किए जाने का दावा किया जा रहा है। यह सिर्फ एक ऑडियो नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल-पट्टी है जहाँ ईमानदारी अब अपराध और भ्रष्टाचार “नियम” बन चुका है।
ऑडियो में क्या है
वायरल ऑडियो में कथित रूप से यह साफ सुना जा सकता है कि सर्वेयरों से तय रकम की मांग की जा रही है भुगतान न करने की स्थिति में काम से हटाने, शिकायतें बढ़ाने और रिपोर्ट बिगाड़ने की धमकी का संकेत है पूरा सिस्टम “ऊपर तक सेट” होने का भरोसा दिलाया जा रहा है
यदि यह ऑडियो वास्तविक है (जिसकी जांच अब अनिवार्य है), तो यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत सीधा अपराध बनता है।
पहले सर्वेयर हटाए, अब ऑडियो सामने
इस ऑडियो के सामने आने से पहले ही शहडोल जिले में कई सर्वेयरों को बिना कारण बताओ नोटिस, बिना विभागीय जांच, एक तरफा आदेश के जरिए हटाया जा चुका है.
सर्वेयर द्वारा कलेक्टर से शिकायत
कलेक्टर को दिए गए लिखित आवेदन में स्पष्ट आरोप हैं कि ईमानदारी से काम करने वालों पर दबाव बनाया गया. अवैध धन न देने पर झूठी शिकायतें खड़ी की गईं. जिला स्तर के कुछ सुपरवाइजरों और एजेंसी के अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चला. अब वायरल ऑडियो उन आरोपों को नई धार देता है।
सवाल जो अब टाले नहीं जा सकते
क्या रुपयों की मांग व्यक्तिगत थी या कंपनी नीतिक्या जिले के सभी सर्वेयरों से एक जैसी रकम मांगी गई. क्या सर्वेयरों को हटाना वसूली से इनकार का परिणाम था. क्या जिला प्रशासन और संबंधित विभाग इस खेल से अनजान थे. क्या यह मामला ईओडब्ल्यू /लोकायुक्त जांच के योग्य नहीं है.
कानून क्या कहता है
यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला बनता है. भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988, आपराधिक षड्यंत्र (IPC 120-B), अवैध वसूली और पद का दुरुपयोग, साथ ही, बिना जांच सर्वेयर हटाना प्राकृतिक न्याय, अनुच्छेद 14 व 21 का खुला उल्लंघन है।
अब मांग साफ है….
वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच साथ में शुभम गुप्ता की अन्य सभी लोगों की बातचीत और मैनेजर मयूर जैन की भूमिका की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच हो. सर्वेयरों को हटाने के आदेशों पर तत्काल रोक लगे, जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को प्रभाव से अलग (Disengage) किया जाए। क्योंकि यह मामला केवल रुपयों की वसूली का नहीं है,
यह सवाल है…
क्या ईमानदारी की कीमत तय हो चुकी है. क्या सरकारी सिस्टम अब प्राइवेट एजेंसियों की बपौती बन गया है.
वही शुभम गुप्ता का कहना हैं की वायरल ऑडियो में उसकी आवाज़ नही।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। वायरल ऑडियो का सच प्रशासन ही निकल पाएगी। या प्रशासन की खामोशी भी जवाब मानी जाएगी।
Author: The Mukhbir
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