April 17, 2026 3:25 pm

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आदिवासियों के नाम पर गाड़ियों को फाइनेंस कराकर धोखाधड़ी खेल उजागर

पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारवार्ता कर सिंहपुर थाना क्षेत्र में हुए फर्जीवाड़े का किया बड़ा खुलासा, 14 वाहन जप्त

The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। आदिवासी और गरीब तबके को लालच देकर उनके नाम पर मोटरसाइकिल और वाहन फाइनेंस कराने वाले एक संगठित गिरोह का सिंहपुर थाना पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। इस पूरे मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और लगभग 18 लाख रुपये मूल्य के 14 वाहन जब्त किए हैं।

क्या है पूरा मामला

दिनांक 25 दिसंबर 2024 को फरियादी अनवर अली (पिता स्व. चिराग अली), निवासी सिंहपुर द्वारा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि रावेंद्र गुप्ता और अभयराज द्विवेदी अपने साथियों के साथ मिलकर आदिवासी एवं गरीब लोगों को आसान किस्तों और लालच का झांसा देकर उनके नाम पर मोटरसाईकिल फाइनेंस के माध्यम से वाहन फाइनेंस कराते थे। फाइनेंस स्वीकृत होते ही वाहन अपने पास रखकर या अन्य लोगों को ऊँचे दामों पर बेच दिए जाते थे, जबकि किस्तों का बोझ गरीब आदिवासियों के सिर मढ़ दिया जाता था।

संगठित अपराध का खुलासा

पुलिस जांच में सामने आया कि यह पूरा खेल पूर्व नियोजित और संगठित तरीके से अंजाम दिया जा रहा था। रावेन्द्र गुप्ता और अभयराज द्विवेदी मास्टरमाइंड की भूमिका में थे। रविकांत सोनी, नुमान खान, मोहित बैगा और जयकुमार राव जरूरतमंद आदिवासियों को तलाशने और उन्हें लाने का काम करते थे।

गिरफ्तारी और बरामदगी

मामले में अपराध क्रमांक 270/24 के तहत धारा 318, 316 बीएनएस में अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रावेन्द्र गुप्ता, अभयराज द्विवेदी, रवि सोनी और मोहित बैगा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस ने 1 रेनो डस्टर कार, 6 एचएफ डीलक्स मोटरसाइकिल, 2 अपाचे, 1 स्प्लेंडर, 1 बजाज सिटी, 1 टीवीएस जुपिटर स्कूटी, 1 टीवीएस स्पोर्ट, 1 टीवीएस सुजुकी एक्सेस कुल 14 वाहन, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 18 लाख रुपये, जब्त किए हैं।

पुलिस की सराहनीय भूमिका

यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव शहडोल के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीवान एवं अनुविभागीय अधिकारी शिवाली चतुर्वेदी पुलिस के मार्गदर्शन में की गई। सिंहपुर थाना प्रभारी एम. एल. रहागडाले एवं पुलिस स्टाफ की सक्रियता से इस संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगा है।
यह मामला सिर्फ फर्जीवाड़े का नहीं, बल्कि गरीब और आदिवासी समाज के शोषण का है। सवाल यह भी उठता है कि ऐसे गिरोह अब तक कैसे खुलेआम सक्रिय रहे और फाइनेंस कंपनियों की भूमिका की भी जांच जरूरी है।
पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और अन्य संलिप्त आरोपियों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधीक्षक की जनता से अपील किसी के पास ऐसी कोई शिकायत हो तो तत्काल सम्बंधित थाने में सम्पर्क करें।
The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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