April 17, 2026 6:01 pm

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एसआईआर के दबाव ने ली बीएलओ की जान, शहडोल में शिक्षक की हार्ट अटैक से मौत

मौत के घंटो बाद भी प्रशासन लापता

The mukhbir शहडोल। लोकतंत्र की नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी निभा रहे एक शिक्षक की जान सिस्टम की बेरुखी और दबाव में चली गई—लेकिन मौत के 15 घंटे बाद भी जिम्मेदारों की संवेदना नहीं पहुंची।
सोहागपुर तहसील के शासकीय प्राथमिक शाला बांध टोला में पदस्थ 54 वर्षीय शिक्षक मनीराम नापित की सोमवार शाम हृदयघात से मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। वे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत बीएलओ का दायित्व निभा रहे थे।

अधिकारी का फोन से बिगड़ी तबीयत

जानकारी के अनुसार सोमवार शाम वे पतेरिया गांव में मतदाताओं से प्रपत्र भरवा रहे थे। इसी दौरान किसी अधिकारी का फोन आया फोन कटते ही उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई। घबराकर उन्होंने बेटे आदित्य नापित को कॉल किया। बेटा तुरंत पहुंचा और उन्हें घर लाया, लेकिन स्थिति बिगड़ती गई। चार पहिया वाहन से मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

“रात-रात भर काम, लगातार दबाव” परिवार का आरोप

पत्नी ममता नापित का रो-रोकर हाल बेहाल है।
परिजनों का कहना है.

“कई दिनों से वे दबाव में थे। रात-रात भर फॉर्म भरना और डिजिटाइजेशन का काम करना पड़ रहा था।”

परिवार बताता है कि मृतक को शुगर और बीपी था, बावजूद इसके लगातार फील्ड में दौड़-धूप और देर रात तक मोबाइल पर निर्देशों की बारिश बंद नहीं हुई।

बेटे आदित्य ने कहा..

“पिता कई बार कहते थे कि एसआईआर के कारण प्रेशर बहुत बढ़ गया है, लेकिन अधिकारियों ने कोई राहत नहीं दी।”

मौत के बाद भी प्रशासन गायब

सबसे शर्मनाक तथ्य यह कि सोमवार देर रात मौत होने के बाद मंगलवार सुबह तक कोई भी विभागीय या प्रशासनिक अधिकारी उनके घर तक नहीं पहुंचा।

स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं.
क्या सिस्टम के लिए बीएलओ सिर्फ एक संख्या हैं?

डेटा बताता है, काम नहीं, अत्यधिक दबाव था

मनीराम नापित बूथ क्रमांक 212 के बीएलओ थे।
यहां कुल 676 मतदाता पंजीकृत हैं।
उन्होंने अकेले 453 फॉर्म का डिजिटाइजेशन पूरा किया यानी 67.01 प्रतिशत उपलब्धि

ग्रामीण शिक्षकों का कहना है.

  • इस बार प्रपत्रों की संख्या असामान्य रूप से बढ़ाई गई
  • पोर्टल की धीमी गति के कारण रातभर ऑनलाइन काम करना पड़ा
  • समीक्षा बैठकों में दबाव बढ़ता गया

“मानवीय दृष्टिकोण जरूरी, नहीं तो और जानें जाएंगी”

स्थानीय लोगों, शिक्षकों और परिजनों की मांगें.

  • मृतक के आश्रितों को सरकारी सहायता
  • एसआईआर और चुनाव कार्य में मानवीय व्यवहार
  • बीएलओ पर दबाव सीमित करने के स्पष्ट निर्देश
  • स्वास्थ्य-जांच और कार्य-समय के नियम

गांव में शोक की लहर है। अंतिम संस्कार मंगलवार कि शाम को किया गया।
लेकिन बड़ा सवाल अब भी हवा में तैर रहा है.

क्या एक और ईमानदार कर्मचारी की मौत भी सिस्टम के लिए सिर्फ आंकड़ा बनकर रह जाएगी…?

The mukhbir के लिए गणेश केवट की रिपोर्ट

The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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