The mukhbir ब्यूरो भोपाल। IAS संतोष वर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में वर्मा ने ब्राह्मण बेटियों को लेकर ऐसा बयान देते सुनाई दे रहे हैं, जिसने पूरे ब्राह्मण समाज को आक्रोश से भर दिया है और प्रदेशभर में विरोध की लपटें तेज़ हो गई हैं।
रविवार को अजाक्स का प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए संतोष वर्मा ने सोमवार को भोपाल में हुए प्रांतीय सम्मेलन में कथित तौर पर कहा…
“जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान में नहीं देता… तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।”
यह बयान सामने आते ही इसे अशोभनीय, आपत्तिजनक और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए समाज ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है।
कई जिलों में शिकायतें, FIR की मांग
ग्वालियर, भोपाल से लेकर प्रदेश के कई थानों में ब्राह्मण समाज ने लिखित शिकायतें दी हैं।
ग्वालियर के मुरार और डबरा थानों में दिए गए आवेदनों में कहा गया कि यह बयान न सिर्फ समाज विशेष का अपमान है, बल्कि बेटियों की प्रतिष्ठा को कलंकित करने वाला है। डबरा में सनाढ्य सभा के सचिव राजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में दर्जनों लोग थाने पहुंचे।
एडवोकेट अनिल मिश्रा ने सख़्त लहज़े में कहा..
“जब अलग-अलग राज्यों में मेरे खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है तो IAS संतोष वर्मा पर क्यों नहीं..?”
पुलिस ने शिकायत भोपाल भेजी, प्रक्रिया का हवाला
एसडीओपी सौरभ कुमार ने आवेदन लेने के बाद स्पष्ट किया कि IAS अधिकारियों पर FIR के लिए निर्धारित प्रक्रिया लागू होती है, इसलिए मामला “थ्रू प्रॉपर चैनल” भोपाल भेज दिया गया है।
फिलहाल प्रशासन ने गेंद राजधानी के पाले में डाल दी है।
पद से हटाने और बर्खास्तगी की मांग तेज़
- मुरार में सवर्ण और ब्राह्मण संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया
- भोपाल के एमपी नगर थाने पर महिलाओं के नेतृत्व में विरोध दर्ज कराया गया
- मांगें साफ़—
- IAS संतोष वर्मा को तत्काल पद से हटाया जाए
- FIR दर्ज की जाए और कठोर कार्रवाई हो
प्रदेश में तनाव की स्थिति भले सब नियंत्रित हैं, लेकिन जनाक्रोश लगातार बढ़ता दिख रहा है।
सरकार और प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
अब तक न तो राज्य सरकार और न ही अजाक्स की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है।
सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं.
क्या सख़्त सेवा आचार संहिता के बावजूद ऐसे बयान बर्दाश्त किए जाएंगे.?
क्या कार्रवाई में देरी हालात को और भड़का सकती है?
अब सभी की नज़रें भोपाल पर
शिकायतें पहुंच चुकी हैं। समाज सड़कों पर है। बयान वायरल है। और अब पूरा मामला राजधानी की मेज़ पर टिक गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद सिर्फ एक बयान का नहीं, प्रशासनिक जवाबदेही बनाम सार्वजनिक आक्रोश की बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
The mukhbir टीम कि खास रिपोर्ट









