
करकी का ‘100% डिजिटलाइजेशन’ का मामला बी.एल.ओ. की चूक या चमत्कार…
The mukhbir शहडोल। जिले की ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 83 (जयसिंहनगर जनपद) की करकी ग्राम पंचायत इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। वजह मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के दौरान पोलिंग बूथ नंबर 237 पर तैनात बी.एल.ओ. कमलेश प्रजापति का तथाकथित ‘100% कार्य’।
यह वही काम है जिसके लिए कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. केदार सिंह ने स्वयं प्रशंसा पत्र सौंपकर कर्मचारी की सराहना की थी। प्रशासन की नजर में यह प्रयास मतदाता सूची के शुद्धिकरण की दिशा में उल्लेखनीय योगदान साबित हुआ था।
लेकिन… कहानी में यहीं से ट्विस्ट कि हुई शुरूआत
मुखबिर के अनुसार, जिस कार्य को ‘शत-प्रतिशत’ बताया गया, उसमें से करीब 425 प्रविष्टियाँ गलत पाए जाने की खबरें सामने आ रही हैं। यानी कुल 651 मतदाताओं में से लगभग दो-तिहाई डेटा में त्रुटियाँ।
अगर यह सच है, तो सवाल उठना लाज़मी है.
क्या यह 100% कार्य था… या 100% भ्रम का जाल
प्रशंसा पत्र मिला, पर अब उठ रहे हैं सवाल
बी.एल.ओ. कमलेश प्रजापति, जो माध्यमिक शाला करकी में सहायक अध्यापक भी हैं, को मतदाताओं से प्राप्त गणना पत्रकों के 100% डिजिटलीकरण के लिए सम्मानित किया गया था।
लेकिन अब आरोप यह हैं कि कई नाम गलत, कुछ उम्रें संदिग्ध, कई पतों में गड़बड़ी और दर्जनों प्रविष्टियाँ मूल रिकॉर्ड से मेल ही नहीं खातीं। यानी, जो काम मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए था, वही अब उसे शक के दायरे में आ गया है।
लापरवाही या लीपापोती प्रशासन भी हैरान
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि जिम्मेदारी इतनी बड़ी थी कि इसे सावधानी और गंभीरता की ज़रूरत थी। लेकिन आरोपों के अनुसार, काम जल्दबाज़ी में निपटाया गया और रिपोर्ट को 100% दिखाकर प्रशासन को गुमराह किया गया। अब जब त्रुटियाँ सामने आई हैं, तो लोगों के बीच यह वाक्य खूब चल रहा है.
“काम कम हुआ, आंकड़े ज़्यादा चमके”
जनता का सवाल अब आगे क्या…
गाँव के नागरिकों में दो बड़े सवाल गूंज रहे हैं. क्या गलत प्रविष्टियों की वास्तविक जाँच होगी, और क्या प्रशस्ति पत्र वापस लिया जाएगा या कार्यवाही होगी.
सूत्र बताते हैं कि मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। क्योंकि सम्मानित कर्मचारी पर इस तरह के आरोप प्रशासन की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करते हैं। मुखबिर की जानकारी अनुसार नायब तहसीलदार द्वारा बी एल ओ को त्रुटि सुधार के लिए 435 नाम की सूची दे दी गई है. और जल्द से सुधार करने की बात कही गई है.
जहाँ मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की बुनियाद है, वहीं बी.एल.ओ. की इस कथित लापरवाही पर लोगों की प्रतिक्रिया कड़ी है।
एक तरफ प्रशासनिक सम्मान, दूसरी तरफ हजारों सवाल…
करकी के इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि “सूची अगर सही न लिखी जाए तो लोकतंत्र की इबारत भी बिगड़ जाती है।”
“बी. एल. ओ. कमलेश प्रजापति द्वारा डाटा फीडिंग में कुछ त्रुटि की गई जिसके कारण ऐसा हुआ लिस्ट उन्हें भेज दी गई है जल्द सुधार हो जाएगा।”
संजय खरे, निर्वाचन सुपरवाइजर
इस संबंध में जब कमलेश प्रजापति जी से उनके फोन पर चर्चा की गई तो उन्होंने कहा मैं अभी व्यस्त हूं बाद में बात करता हूँ.
कमलेश प्रजापति, बी.एल.ओ. करकी









