The mukhbir Editor in Chief- राहुल सिंह राणा शहडोल। छत्तीसगढ़ से मध्यप्रदेश तक चल रहे रेत परिवहन का खेल अब खुलेआम कानूनों को चुनौती देता दिख रहा है। दोनों राज्यों के खनन-परिवहन कानून बेहद सख्त होने के बावजूद, ओवरलोड वाहनों की कतारें, फर्जी ट्रांजिट पास, बिना GPS ट्रैकिंग की गाड़ियां और रात के अंधेरे में जारी रेत की अवैध आपूर्ति कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ा रही हैं।

रेत माफिया जहां चाहे वहां से रेत निकाल रहे हैं, और जहां मुनाफा दिखे वहां भेज रहे हैं. शहडोल, रीवा, सतना… हर जगह। लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य सरकारों के इतने कड़े नियम होने के बावजूद यह अवैध कारोबार चलता कैसे है.
छत्तीसगढ़ सरकार के नियम
छत्तीसगढ़ के कड़े नियम, जिन्हें कागजों में माना जाता है, जमीन पर नहीं. छत्तीसगढ़ में रेत खनन और परिवहन के लिए नियम बेहद सख्त हैं. वैध ट्रांजिट पास अनिवार्य, रेत परिवहन के लिए ट्रांजिट पास (अभिवहन पास) होना जरूरी। पास में कोई खाली कॉलम, कोई कटिंग, कोई बदलाव होने पर पास तुरंत अमान्य। पास की मूल प्रति ड्राइवर के पास, कार्बन कॉपी विभाग के रिकॉर्ड में। एक वाहन, एक पास, एक ट्रिप।
अवैधता पर सख्त सजा
अवैध खनन और परिवहन 5 साल तक की जेल और ₹ 5 लाख का जुर्माना। बिना लाइसेंस खनिज का भंडारण भी अपराध। परिवहन का वैज्ञानिक तरीका (Form-II) प्रत्येक परिवहन ‘फॉर्म-II’ के तहत दर्ज होना आवश्यक। खदान के उत्पादन की रॉयल्टी मासिक जमा
ग्रामीण उपयोग पर रियायत
कुछ स्थितियों में जैसे घर निर्माण, कुँआ, कृषि कार्य पंचायतों द्वारा किए गए सार्वजनिक कार्य
इन पर रॉयल्टी में छूट दी जाती है। लेकिन इन नियमों के बीच भी अवैध ओवरलोड परिवहन बेखौफ चलता दिख रहा है।
मध्यप्रदेश सरकार के नियम
मध्यप्रदेश में कड़े, आधुनिक नियम लेकिन वह भी कागज़ों तक सीमित. प्रदेश में रेत परिवहन कानून और भी कठोर हैं. जिसमें सिर्फ GPS-सक्षम वाहन ही रेत ला सकते हैं. बिना GPS रेत का परिवहन अवैध कहलाता है. वाहनों की लोकेशन, मार्ग, समय सबकी लाइव निगरानी जरुरी है. मानसून काल में पूर्ण प्रतिबंध (1 जुलाई–30 सितंबर) इस अवधि में खनन, परिवहन पूरी तरह बंद. सिर्फ पहले से स्टॉक की गई रेत की अनुमति, भारी दंड व्यवस्था पहली बार वाहन पकड़े जाने पर रॉयल्टी का 30 गुना, दूसरी बार 40 गुना, तीसरी बार 50 गुना, चौथी बार 70 गुना और वाहन जप्त।
संवेदनशील स्थानों के पास खनन प्रतिबंध
पुलों, राष्ट्रीय-राज्य मार्ग, रेलवे लाइन से 75 मीटर, कच्ची सड़क से 10 मीटर, नाला से 25 मीटर तक रेत खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध है. निगरानी के लिए मोबाइल एप और चेतावनी बोर्ड, परिवहन मार्ग का रिकॉर्ड, अवैध गतिविधि की सूचना पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था शासकीय नियम में अंकित है.
लेकिन दोनों राज्यों के नियम मिलकर भी रेत के सिंडिकेंट को रोक नहीं पा रहे. छत्तीसगढ़ के ग्राम पंचायत मलकडोल के खसरा न. 53 के 4 हेक्टेयर से रेत निकल कर शहडोल, रीवा और सतना पहुंच रही है. जहां नकली या अधूरे ट्रांजिट पास, ओवरलोड वाहन, बिना रॉयल्टी, अवैध उत्खनन कर बिना GPS वाहनों से रेत का काला कारोबार खुलेआम फलफुल रहा है. और मध्यप्रदेश की सीमाएं पार करते ही…GPS की अनिवार्यता, मॉनिटरिंग, नियम सब धरे रह जाते हैं। वाहन सीधे शहडोल, रीवा, सतना और अन्य स्थानों पर पहुंच रहें है. जहां अवैध रेत की विशाल मांग माफिया को और ताकत देती है।
रेत का यह काला खेल पैसे का बढ़ावा दे रहा और कानून का सूखा कर रहा है. खनिज, परिवहन और पर्यावरण विभाग को करोड़ों का नुकसान हो रहा है.
सड़कों का बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही है, तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों से हादसे बढ़ रहें है. और इन सबके पीछे एक ही सच…
“नियम किताबों में हैं, कार्रवाई ज़मीनी हकीकत में कहीं खो जाती है।”
दो राज्यों के कानून सख्त…पर माफिया उससे भी ज्यादा सख्त
छत्तीसगढ़ के कानून कहते हैं. बिना ट्रांजिट पास रेत नहीं निकलेगी और मध्यप्रदेश के कानून कहते हैं. GPS बिना वाहन नहीं चलेगा।
लेकिन जमीनी हकीकत कहती है.
“रेत तो दोनों राज्यों से बहकर माफिया की जेब में जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त कार्रवाई की ओवरलोड वाहनों की 100% चेकिंग की, पास की डिजिटल वेरिफिकेशन की, GPS मॉनिटरिंग की कड़ी समीक्षा की, और सबसे जरूरी जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय करने की तभी इस ‘रेत तंत्र’ की कार्यवाही संभव है,
वरना रेत बहती रहेगी… और कानून दरकता रहेगा।
The mukhbir टीम









