
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। सांसद खेल महोत्सव के तहत आयोजित परंपरागत लाठी खेल प्रतियोगिता में इस वर्ष उत्साह और ऊर्जा देखते ही बनी। सांसद हिमाद्री सिंह के निर्देशन में आयोजित इस प्रतियोगिता का आयोजन नेताजी सुभाषचंद्र बोस बालिका छात्रावास प्रांगण में किया गया, जहाँ जिले के विभिन्न विद्यालय, महाविद्यालय एवं छात्रावासों से कुल 224 बालक-बालिकाओं ने हिस्सा लिया।
सांसद खेल के संयोजक एवं क्रीड़ा भारती के प्रांत मंत्री डॉ. राकेश त्रिपाठी ने बताया कि लाठी खेल न केवल परंपरा का प्रतीक है बल्कि युवाओं में अनुशासन, साहस और संतुलन विकसित करता है। प्रतियोगिता का संचालन निर्देशक प्रमोद विश्वकर्मा द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि सभी वर्गों में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागियों को समापन समारोह में माननीय सांसद द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम में विशेष उपस्थितियां
कार्यक्रम में अनेक प्रतिष्ठित अतिथियों एवं खेल से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहभागिता ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। इनमें प्रमुख रूप से गंगा राजू पांडेय, क्षेत्र शारीरिक प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अमरनाथ सिंह, डीपीसी शहडोल, मनोज गौतम, विभाग संपर्क प्रमुख, क्रीड़ा भारती, डॉ. राकेश त्रिपाठी, संसदीय खेल प्रभारी एवं प्रांत मंत्री, क्रीड़ा भारती, पुष्पराज सिंह, जिला अध्यक्ष, क्रीड़ा भारती महेन्द्र मिश्रा, बी आर सी सी शहडोल, प्रमोद विश्वकर्मा, महासचिव, म.प्र. लाठी खेल संघ, संजय सिंह कंघीकार, राष्ट्रीय निर्णायक एवं जिला सहमंत्री, क्रीड़ा भारती, गुरदीप सिंह, शिवानी नामदेव (मातृशक्ति प्रमुख), शिवानी यादव, अजय सोंधिया, वार्डन किरण सिंह, प्रतिभा चौधरी, सुधा पाण्डेय, सहायक बार्डन श्रद्धा सिंह, सावित्री मिश्रा, मंजू शुक्ला इन सभी के मार्गदर्शन एवं सहभागिता ने प्रतियोगिता को सफल और यादगार बनाया।
खिलाड़ियों में दिखा उत्साह
लाठी खेल के विभिन्न चरणों में प्रतिभागियों ने बेहतरीन कौशल का प्रदर्शन किया। बच्चों और बालिकाओं दोनों ने लाठी के पारंपरिक प्रताप, तालमेल और तकनीक को सटीक रूप से प्रस्तुत किया। मैदान में गूंजती ताल और लाठी के संतुलन ने वातावरण को रोमांच से भर दिया।
सांसद खेल महोत्सव का यह आयोजन न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच प्रदान करता है, बल्कि भारतीय पारंपरिक खेलों को सुरक्षित और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी है। 224 प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी यह साबित करती है कि लाठी खेल आज भी युवाओं में जोश, साहस और संस्कृति के प्रति सम्मान जगाने में सक्षम है।
The mukhbir से गणेश केवट की रिपोर्ट









