…अब रेत के साथ मुरूम का भी अवैध उत्खनन !
…महाकाल मिनरल्स ने उमरिया को बना दिया ‘अवैध खनन का कुरुक्षेत्र’
The Mukhbir Editor in Chief राहुल सिंह राणा, उमरिया। जिले में लाइसेंसी खनन माफिया का ऐसा नंगा नाच पहले कभी नहीं देखा गया। रेत का वैध ठेका पाकर खुद को कानून से ऊपर समझने वाला बाबा महाकाल मिनरल्स अब इस हद तक बेलगाम हो चुका है. कि अब उसे न अवैध रेत उत्खनन का डर, न अवैध मुरुम उत्खनन का भय और न ही प्रशासन की मौजूदगी, लगता है जैसे पूरा सिस्टम ठेकेदार की जेब में बंद हो गया हो।
जिस सोन नदी के दम पर उमरिया की धरती सांस लेती है, उसी नदी की बीच धार को काटकर अब मुरूम डालकर सड़कें बनाई जा रही हैं, ताकि अवैध उत्खनन और भी ज्यादा तेज़ी से हो सके। यह सिर्फ खनन नहीं…यह प्रकृति की हत्या है।
टीपी का खेल: बंद खदान की पर्ची, अवैध खदान से लोडिंग… खुला खेल
मानपुर तहसील के गोवर्दे गांव की बंद खदान की टीपी काटी जा रही है, और रेत अमिलिया की अवैध खदान से लोड हो रही है।
आज का ताज़ा मामला,
गाड़ी नंबर MP-19-ZK-2799 सोन नदी के बीचों बीच टीपी प्रिंट कराने रुकी। पूछने पर ड्राइवर का साफ बयान:
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रेत अमिलिया से लोड होती है
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लेकिन टीपी गोवर्दे की दी जाती है
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रेत कम और पैसा ज्यादा
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दर ₹35 प्रति फुट, खुली लूट जारी
यह कौन सा लाइसेंस है.
यह तो माफिया मॉडल है, जहां कानून सिर्फ कागज पर और खेल मैदान नदी की रेत में।
जिम्मेदारों की चुप्पी, क्या सिस्टम बिक गया है.
उमरिया का जिला प्रशासन, खनिज विभाग और पुलिस विभाग ने मानो आंखों पर पट्टी बांध ली है।
शिकायतों की फ़ाइलें मोटी हो रही हैं, पर कार्रवाई की स्याही सूख चुकी है।
ऐसा लगता है जैसे पूरा तंत्र इस अवैध साम्राज्य के आगे घुटने टेक चुका है।
जिले की जीवनदायिनी नदियाँ छलनी हो रही हैं, ग्रामीण त्रस्त हैं, पर अफ़सरों की नींद नहीं टूट रही।
मोहवला में नया कारनामा, सरकारी जमीन का चीरहरण
अब बारी है मोहवला सोन नदी की।
यहाँ नदी की बीच धार में मुरूम डालकर सड़क बनाई जा रही है. अमिलिया के सरकारी खसरा नंबर 130, 131 से मुरूम खींचा जा रहा है. पोकलेन–हाइवा रात-दिन दौड़ रहे हैं. यह पूरा खेल बिना अनुमति, बिना लाइसेंस, बिना डर के चल रहा है. यह सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं यह NGT, सुप्रीम कोर्ट, और पर्यावरणीय नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाना है।
उमरिया में महाकाल नहीं, ‘माइनिंग माफिया मॉडल’ हावी
‘महाकाल’ नाम का सहारा लेकर ठेकेदार अपने काले कारोबार को दिव्यता का चोला पहनाकर पेश कर रहा है।
पर हकीकत यह है. लाइसेंसी रेत माफिया, रेत के साथ मुरूम सरकारी जमीन से कर रहे हैं. टीपी घोटाला कर करोड रुपए की कमाई भी कर रहे हैं. और इधर भी कई मशीनों को नदी में उतरकर नदी का विनाश भी कर रहे हैं.
उमरिया में कानून एक शब्द है, और महाकाल मिनरल्स उसका सीधा उल्लंघन…
जनता का सीधा सवाल..
क्या उमरिया का जिला प्रशासन जान बूझकर आंखें मूंद रहा है.
क्या खनिज विभाग में सबको बिना आवाज़ समझ आ गया है.
क्या पुलिस सिर्फ गाड़ियों की नंबर प्लेट देखने भर को रह गई है.
क्या सोन नदी का जीवन अब ठेकेदारों की मर्जी पर चलेगा.
यह अब सिर्फ अवैध उत्खनन नहीं,
यह उमरिया की रेत, मिट्टी, नदी और भविष्य का खुला शोषण है।
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अगर इस खनन तांडव पर लगाम नहीं लगी, तो आने वाली पीढ़ियां पूछेंगी…
“जब नदी मर रही थी, तब जिम्मेदार सो क्यों रहे थे”
इस खबर के संबंध में जब खनिज अधिकारी को फोन लगाया गया उनका फोन बंद रहा..
The mukhbir टीम…
Author: The Mukhbir
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