April 17, 2026 6:02 pm

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अमृता हॉस्पिटल पर मरीज से अवैध वसूली का आरोप

अमृता अस्पताल प्रबंधन द्वारा गंभीर लापरवाही का मामला
The mukhbir शहडोल-मध्य प्रदेश। उमरिया जिले के तहसील मानपुर के बल्होड निवासी धीरेन्द्र गुप्ता द्वारा कलेक्टर शहडोल एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला शहडोल को सौंपे गए एक लिखित शिकायत-पत्र में शहडोल-रीवा रोड स्थित अमृता हॉस्पिटल और उससे जुड़े चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत-पत्र के अनुसार, उपचार के दौरान मरीज के परिजनों से न केवल अनियमित राशि वसूली गई, बल्कि बीमारी की वास्तविक स्थिति छिपाकर अनावश्यक खर्च बढ़ाने का भी प्रयास किया गया।

क्या है पूरा मामला

शिकायतकर्ता ने बताया उसके भतीजे पर्व गुप्ता 6 वर्ष पिता नागेंद्र गुप्ता कि अचानक तबियत खराब होने कि वजह से उसे इलाज के लिए अमृता हॉस्पिटल, शहडोल में 8 नवम्बर 2025 कि शाम भर्ती कराया गया था। जिसके एडमिशन का UHID-0131312 नंबर है. जिसे एम. डी. पेड़ीट्रिक डॉक्टर हर्ष नारायण तिवारी द्वारा देखा गया। परिवार का आरोप है कि प्रारंभिक अवस्था में डॉक्टर द्वारा बच्चे को गंभीर स्थिति बताकर लगभग ₹40,000 तक की खर्चा बताया गया, जबकि वास्तविक स्थिति इतनी गंभीर नहीं थी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, दूसरे अस्पतालों में पूछताछ करने पर डॉक्टरों ने बताया कि उपचार में इतना भारी खर्च नहीं आता। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उनसे नगद ₹20,000 और ₹20,000 के साथ अन्य जाँच के नाम पर ₹15,000 नकद लिया गया और ₹5,000 आयुष्मान में कुछ गड़बड़ी सुधारने के लिए लिया गए, कुल रकम लगभग ₹60,000 राशि ले ली गई. और भी अन्य “अनावश्यक मदों” में रकम भी जमा करवाई।
शिकायत में यह भी आरोप है कि अस्पताल द्वारा मरीज के पिता नागेंद्र गुप्ता के आयुष्मान-कार्ड से ₹27,800 राशि का उपयोग किया गया है.
मरीज की स्थिति को लेकर भ्रम भी फैलाया गया और परिजनों पर आर्थिक दबाव बनाया गया।

ऑपरेशन को लेकर बड़ा आरोप

शिकायतकर्ता ने कहा कि बच्चे पर किए गए ऑपरेशन की आवश्यकता पर संदेह है। उनका कहना है कि परिजन ऑपरेशन नहीं चाहते थे, लेकिन उन्हें बताया गया कि “स्थिति गंभीर है”, जिसके कारण वे विवश होकर ऑपरेशन कराया गया। इसके बाद भी अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो अस्पताल प्रबंधन द्वारा बच्चों को जबलपुर रेफर कर दिया गया. शिकायतकर्ता ने अपने शिकायत-पत्र में बताया कि असफल ऑपरेशन के कारण बच्चों की तकलीफ बढ़ रही थी। जिसके बाद 16 नवम्बर 2025 को अमृता हॉस्पिटल के प्रबंधन द्वारा मरीज को जबलपुर रेफर कर दिया गया. शिकायतकर्ता ने बताया कि आनंद फानन में मरीज को केयर हॉस्पिटल जबलपुर में 17 नवम्बर 2025 को एडमिट कराया गया और 7 दिन वहां रहने के बाद लगभग ₹1,50,000 (डेढ़ लाख रुपए) का खर्चा आया. इस दौरान अमृता हॉस्पिटल के प्रबंधन द्वारा उन्हें मोबाईल के माध्यम से यह विश्वास दिलाया गया था कि इलाज में जो भी खर्च आएगा उसमें अस्पताल प्रबंधन द्वारा सहायता की जाएगी लेकिन बच्चों के इलाज के बाद अस्पताल प्रबंधन द्वारा मुकर गया. और बार-बार प्रबंधन के मोबाईल नंबर 6261018004 पर फोन लगाया गया तो शिकायतकर्ता का नंबर ब्लैक लिस्ट में डाल दिया गया. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अमृता अस्पताल द्वारा उसके साथ लूट और धोखाधड़ी की गई है.

प्रशासन से न्याय की मांग

पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए, अस्पताल और जिम्मेदार चिकित्सकों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, परिजनों से वसूली गई राशि वापस दिलाई जाए, और ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था बनाई जाए।
शिकायतकर्ता ने कहा कि यह केवल उनके परिवार का मुद्दा नहीं, बल्कि कई अन्य परिवार भी ऐसी मनमानी का सामना कर रहे हैं।

अस्पताल की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा

समाचार में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए मोबाईल नंबर 6261018004 पर फ़ोन लगाया गया तो उन्होंने फ़ोन नही उठाया. पर कुछ देर बाद 9098809227 से फोन आया तो उन्होंने बताया शिकायत निराधार है.

The mukhbir से सुनीता सिंह कि रिपोर्ट 

The Mukhbir
Author: The Mukhbir

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