बाबा महाकाल का भौकाल, पार्ट-2
The mukhbir राहुल सिंह राणा- शहडोल/उमरिया। लाइसेंसी रेत माफिया के महासंग्राम में प्रशासन के मौन स्वीकृति और ग्राम पोंडीकला, रेउसा और सेमरपाखा के ग्रामवासियों ने आरोप लगाया है कि शहडोल-उमरिया कि सीमा के टेढ़ी घाट और डोहरा नाला क्षेत्र से लाइसेंसी रेत माफिया द्वारा अवैध रूप से रेत का खनन कर परिवहन किया जा रहा है. ग्रामीणों का धैर्य के बांध टूटने के बाद विस्फोटक अध्याय बाबा महाकाल का भौकाल, पार्ट -2 अब सामने आ गया है।
पोंडीकला, रेउसा और सेमरपाखा के ग्रामवासियों की ओर से जिला कलेक्टर शहडोल, प्रतिलिपि- पुलिस अधीक्षक शहडोल, खनिज अधिकारी शहडोल, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व जयसिंहनगर और थाना प्रभारी ब्यौहारी को सौंपे गए ताज़ा शिकायत-पत्र ने लाइसेंसी रेत माफिया के कारनामों के पूरे मामले को नए सिरे से झकझोर दिया है।
रेत माफिया का कहर, जहां लीज़ नहीं, वहां भी खुदाई जारी
ग्राम पोंडीकला, रेउसा और सेमरपाखा के ग्रामीणों का आरोप है कि “मेसर्स बाबा महाकाल प्रा. लिमिटेड” ने जिला उमरिया के 26 रेत खदानों कि लीज का टेंडर लिया है. और जिन स्थानों में कंपनी को रेत उत्खनन कर परिवहन करने की अनुमति दी गई है.उन जगहों में लीज़ को ढाल बनाकर शहडोल जिले के पोंडीकला टेढ़ी घाट और डोहरा नाला के संगम क्षेत्र में धड़ल्ले से अवैध रेत उत्खनन कर परिवहन शुरू कर दिया है। और माजरा यह है कि जहां लीज़ की अनुमति नहीं है, वहां रात-दिन पोकलेन और डंपर गरजना हो रही हैं। लाइसेंसी रेट माफिया द्वारा नदी के दो भागों में बाट कर वाटर-कट करके अवैध रेत निकाली जा रही है. जिससे नदी का प्रवाह तो बिगड़ ही रहा, नदी के तट कटाव बढ़ रहा और भविष्य में पर्यावरण संकट गहरा खतरा भी बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का साफ कहना “ये सब बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव ही नहीं”
अवैध रेत के ट्रकों से टूटी सड़कें, गांव में तबाही का माहौल
ग्रामवासियों का आरोप है कि ओवरलोड भारी डंपरों की अनियंत्रित आवाजाही से सड़कें टूट गईं है, रास्ते कि पुलिया डगमगाने लगीं है. और दिनभर धूल के गुबार से ग्रामीणों का जीवन नरक बन गया है। “कंपनी का भौकाल इतना कि मानो पूरा इलाका इनके कब्ज़े में आ गया हो” कंपनी के कई गुर्गे (गुंडे) रात-दिन दर्जनों मोटरसाइकिल से आवाजाही करते हैं और अवैध हथियारों के साथ उन्हें डरते और धमकाते हैं. सकल-सूरत से यह सभी आदतन अपराधी लगते हैं और कहां से आए हैं किसी को पता नहीं. संभावना यह भी है कि यह लोग यहां अपनी जुर्म को छुपा कर रह रहे हैं।
पर्यावरण पर सीधे हमला, गाँव वाले बोले: ‘नदी बचाओ-गाँव बचाओ’
बाबा महाकाल के भौकाल के कारण लगातार अवैध खुदाई से जारी है. जिससे नदी की संरचना लगातार बिगड़ रही है. ग्रामीणों के जलस्रोत प्रभावित हो रहे है. और खेती में संकट आ रही है और अब तो ग्रामीणों को पीने के पानी तक की चिंता होने लगी है। गाँव की महिलाओं ने स्पष्ट चेतावनी दी “अगर लाइसेंसी रेत माफिया पर रोक नहीं लगी, तो हम सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे।”
जनता का धैर्य समाप्त कलेक्टर से कार्रवाई की गुहार
शिकायत-पत्र में स्पष्ट लिखा है कि प्रशासन द्वारा 3 दिवस पर कार्रवाई नही कि तो ग्राम पोंडीकला, रेउसा और सेमरपाखा के किसान, मजदूर और ग्रामीण विशाल आंदोलन कर धरना-प्रदर्शन करेंगे।
यह पूरा खेल उमरिया कि प्रशासनिक लापरवाही, कंपनी की मनमानी, माफियाई दबदबा के मिश्रण से चल रहा है।
सवालों के घेरे में प्रशासन, कौन दे रहा है संरक्षण
सबसे बड़ा सवाल यही जब गाँव वाले लगातार गुहार लगा रहे, नदी का अस्तित्व खतरे में है, पर्यावरण तड़प रहा है. हाथियों के मूवमेंट वाली जगह से नदी का स्वरूप बदला जा रहा है.
तो ऐसी कौन सी ताकत है जो बाबा महाकाल के भौकाल को जिला उमरिया-शहडोल में खुलेआम उत्खनन और की हिम्मत देती है.
क्या यह कागज़ी कार्रवाई की चौंकाने वाली कमजोरी है. या फिर “सबकुछ जानते हुए भी चुप रहने” का सरकारी सिंड्रोम.
‘भौकाल’ का असली चेहरा, ग्रामवासियों का एक ही संदेश:
“रोक लगाओ, वरना चक्का-जाम हमारा आखिरी हथियार होगा” ग्रामवासियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन जल्द अवैध रेत निकासी को नही रोकेगा तो पूरा क्षेत्र आंदोलन की चपेट में होगा।
भौकाल बहुत हुआ, अब जनता का हिसाब शुरू…
“बाबा महाकाल का भौकाल पार्ट-2”
सिर्फ लाइसेंसी ठेकेदार द्वारा अवैध रेत उत्खनन की कहानी नहीं, यह उस सिस्टम की भी पोल-पट्टी खोलता है. जहां साधारण ग्रामीण न्याय के लिए चक्कर काटते रहते हैं. और माफिया खुलेआम नदी की छाती चीरते रहते हैं।
अब गेंद प्रशासन के पाले में है….
या तो कार्रवाई, या फिर जनता का प्रतिकार।
इन्होने बताया…
शिकायत पत्र प्राप्त हुआ है. दोनों जिले की राजस्व विभाग की टीमों को बुलाकर सीमांकन किया जाएगा. स्वीकृत खदान से अगर रेत नहीं निकाली जा रही है तो नियमतः कंपनी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
राहुल शांडिल्य, खनिज अधिकारी शहडोल
(नोट- जिला खनिज अधिकारी उमरिया को भी फोन लगाया गया लेकिन उनका फोन नहीं उठा।)
The mukhbir टीम- चंदन कुमार वर्मा, जितेंद्र कुमार विश्वकर्मा, गणेश कुमार केवट, सुनीता सिंह..
Author: The Mukhbir
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