-पार्षद ने कि कई शिकायत, सीएम हेल्पलाइन और नपा के नोटिस के बाद भी बना पट्टा.

–एक बार फिर से हुई कमिश्नर शहडोल शिकायत.
The Mukhbir राहुल सिंह राणा-शहडोल (मध्यप्रदेश)। शहर के सिंहपुर रोड स्थित ग्राम मतनी, वार्ड क्रमांक 30 में अवैध प्लॉटिंग और गैरकानूनी कॉलोनी निर्माण का मामला अब केवल स्थानीय विवाद नहीं रहा, बल्कि यह राजस्व और नगरीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न बन गया है। शिकायतकर्ता पार्षद ने 4 दिसंबर 2025 को कमिश्नर शहडोल श्रीमती सुरभि गुप्ता को अपने शिकायत पत्र में बताया है कि अवैध प्लाटिंग और अवैध कॉलोनी को लेकर उसके द्वारा लगातार शिकायतें और सीएम हेल्पलाइन लगाई गई. इसके बावजूद नगर पालिका के भ्रष्ट कर्मचारियों ने साठ-गाठ कर अवैध गुजराती कॉलोनी का निर्माण कर दिया।
यह वही मामला है, जिसकी शिकायत वार्ड 30 के पार्षद दानिश अहमद द्वारा 17 अप्रैल 2025 को न केवल लिखित रूप में, बल्कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से भी दर्ज कराई गई थी। इसके बावजूद भूमि का नामांतरण हुआ और पट्टा भी जारी कर दिया गया।
कृषि भूमि को कॉलोनी में बदलने का आरोप
दस्तावेज़ों के अनुसार खसरा क्रमांक 14/3/1/2 एवं उससे लगे अन्य खसरों की कृषि भूमि को छोटे-छोटे भूखंडों में काटकर बिना वैधानिक अनुमति बेचा गया। ना सड़क, ना नाली, ना पानी, ना लेआउट कि स्वीकृति और फिर भी निर्माण चलता रहा। शिकायतकर्ता ने बताया कि मतनी टोला में गुजराती कॉलोनी का अवैध निर्माण कर लिया गया है. और उसमें रमेश चंद्र राठौर को 28 जुलाई 2025 को खसरा क्रमांक 14/3/1/1 प्लांट एरिया 270.230 में भवन निर्माण के लिए नगरपालिका शहडोल द्वारा अनुज्ञा पत्र जारी कर दिया गया है।

शिकायतें हुईं, चेतावनियाँ दी गईं
पार्षद द्वारा लगाए गए आरोपों में नगर पालिका शहडोल को पहले चेताया गया था कि अवैध प्लॉटिंग हो रही है. और इसकी सूचना हल्का पटवारी को भी दी थी. नगर पालिका व राजस्व विभाग को भी अवगत कराया गया. सीएम हेल्पलाइन (शिकायत क्रमांक 25824508) पर भी मामला दर्ज हुआ और नगर पालिका अधिकारी द्वारा दिनांक 2 मई 2025 को जारी पत्र क्रमांक न.प.श./अ.भू./180 में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सोहागपुर को यह स्पष्ट किया गया कि बिना अनुमति भूखंडों का विक्रय किया जा रहा है और इसकी जानकारी कलेक्टर, कमिश्नर एवं संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन को भेजी गई।
वार्ड नंबर 30 के पार्षद दानिश अहमद द्वारा 17 अप्रैल 2025 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी शहडोल को अपने शिकायत पत्र में बताया था कि नगरपालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 30 में स्थित आराजी खसरा क्रमांक 14/3/1/2 ग्राम मतनी टोला में अवैध प्लॉटिंग का मामला सामने आया है। पार्षद द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दी गई शिकायत में आरोप था है कि बिना अनुमति, ले-आउट स्वीकृति और आधारभूत सुविधाओं के भूमि का अवैध विक्रय किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार नियमों की अनदेखी कर सड़क, नाली व सार्वजनिक सुविधाओं के लिए छोड़ी गई भूमि पर कब्जा किया गया है, जिससे शासन को राजस्व हानि हो रही है। मामले की जांच कर अवैध निर्माण व प्लॉटिंग पर कार्रवाई की मांग की गई है।

नगर पालिका ने जारी किया था नोटिस
शहडोल नगरपालिका ने शिकायतकर्ता की शिकायत पर जांच करते हुए अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सोहागपुर को पत्र क्रमांक न.प.श./ अ. भू./180/ दिनांक 2 मई 2025 को पत्र जारी कर बिना सक्षम अनुमति के कॉलोनाइजरों द्वारा ग्राम मतनी में रमेश चंद्र राठौर खसरा नंबर 14/3/1/2, ग्राम सोहागपुर में लल्लू बैगा खसरा नंबर 304/1 व ग्राम सौखी में भूपेंद्र अरोरा खसरा नंबर 120/19/2/2/2 में अवैध रूप से भूमि के छोटे-छोटे टुकड़े कर बिक्री की जा रही है। नगरपालिका की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि कॉलोनी विकास की कोई वैधानिक स्वीकृति नहीं ली गई, फिर भी खुलेआम प्लॉट बेचे जा रहे हैं। मामला उजागर होने के बाद रिपोर्ट राजस्व विभाग को कार्रवाई हेतु भेजी गई है, जिससे अवैध प्लॉटिंग माफिया में हड़कंप मच गया था।

फिर भी नहीं रुका अवैध निर्माण
पार्षद की शिकायत, अवैध प्लॉटिंग पर रिपोर्ट और स्वयं मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सोहागपुर को पत्र लिखे जाने के बावजूद नगर पालिका के कर्मचारियों ने खुली साठगांठ कर नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। अवैध गुजराती कॉलोनी, कट्टी मोहल्ला शहडोल स्थित खसरा क्रमांक 14/3/1/1 (कुल क्षेत्रफल 270.230) में 28 जुलाई 2025 को रमेश चंद्र राठौर को भवन निर्माण की अनुज्ञा पत्र जारी कर दिया गया। यह पूरा मामला प्रशासनिक मिलीभगत और संरक्षण की ओर साफ इशारा करता है, जिसने कानून को मज़ाक बना दिया है। सबसे गंभीर पहलू यह है कि शिकायतों कि लंबी फेहलिस्ट और लगातार पत्राचार के बाद भी न तो निर्माण रुका, न ही भूमि कि बिक्री। इतना ही नहीं, आरोप है कि पूर्व हल्का पटवारी विजय विश्वकर्मा एवं पूर्व तहसीलदार के नाम का प्रभाव बताकर भूमि का नामांतरण कराया गया और पट्टा भी बनवा लिया गया।
प्राकृतिक नाले पर कब्जे का आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख है कि अवैध कॉलोनी के चलते प्राकृतिक नाले का रास्ता रोका गया, आसपास के मोहल्लों में गंदा पानी भरने लगा और बीमारियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया।यानी मामला केवल भूमि का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य से जुड़ा संकट भी बन चुका है।
सबसे बड़ा सवाल: पट्टा कैसे बना
जब भूमि अवैध प्लॉटिंग में चिन्हित थी. शिकायतें लंबित थीं. प्रशासन को लिखित सूचना दी जा चुकी थी. तो फिर नामांतरण किस नियम के तहत किया गया, पट्टा किस आधार पर जारी हुआ, और क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या मिलीभगत. इस पुरे मामले में प्रशासन की चुप्पी संदेह बढ़ाती है. पुरे प्रकरण में किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई न दिखने से यह संदेह और गहराता जा रहा है कि कहीं नियम केवल कागज़ों तक ही सीमित तो नहीं रह गए हैं।
जनहित में उठती मांग
स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि अवैध प्लॉटिंग की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, नामांतरण व पट्टा प्रक्रिया की भी स्वतंत्र जांच हो, दोषी अधिकारियों व भूमाफियाओं पर कठोर कार्रवाई की जाए।
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शासन को हुई राजस्व हानि की वसूली हो
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अवैध कॉलोनी पर तत्काल रोक और ध्वस्तीकरण किया जाए.
इन्होने कहा….
नायब तहसीलदार मैडम के साथ जाँच में गए थे नाली और जल निकासी कि समस्या सही पाई गई कार्यवाही कि जाएंगी.
राम नरेश सिंह, पटवारी मतनी टोला
पत्र नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा अनुविभागीय राजस्व अधिकारी सोहागपुर को भेजा गया था. उनके द्वारा क्या कार्यवाही कि गई इसकी जानकारी अभी नही है।
शरद द्विवेदी, राजस्व निरीक्षक, नगरपालिका शहडोल
“यदि इस मामले में सख़्त कार्रवाई नहीं हुई यह संदेश जाएगा कि शहडोल में कानून से ऊपर प्रभाव चलता है।”









