
कानून मौन, माफिया बेखौफ, शासन को खुली चुनौती
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। जिले में जहां एक ओर शासन की ओर से एक भी वैध रेत खदान स्वीकृत नहीं है, वहीं दूसरी ओर धनगवा–नवलपुर क्षेत्र में सोन नदी को छलनी कर अवैध रेत उत्खनन का खुला खेल बदस्तूर जारी है। यह कोई छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि ऐसा काला कारोबार है जो पुलिस-खनिज विभाग की नाक के नीचे और कथित संरक्षण में फल-फूल रहा है। नवलपुर सोन नदी के रपटा घाट पर दिन-रात रेत की लूट बेखौफ जारी. मुखबिर सूत्रों कि माने तो धनगवा निवासी कोमल और प्रताप, अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर नवलपुर सोन नदी के रपटा घाट से दिन-रात रेत का अवैध उत्खनन कर रहे हैं। यह रेत बिना किसी अनुमति, बिना रॉयल्टी, बिना पर्यावरणीय स्वीकृति के सीधे शहडोल शहर में खपाई जा रही है।
₹8,500 में बिक रही है अवैध रेत
सूत्रों के अनुसार अवैध रूप से निकाली गई रेत को शहडोल मार्केट में ₹8,500 से ₹9,000 प्रति डग्गी की दर से बेचा जा रहा है। यानी शासन को राजस्व का सीधा नुकसान और माफियाओं को हर रोज लाखों की कमाई।
वर्दीधारी संरक्षण की गंभीर आरोप
इस पूरे काले कारोबार में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बुढ़ार थाने में पदस्थ एक आरक्षक खुलेआम रेत माफियाओं का साथ दे रहा है।
मुखबिरों का दावा है कि यह आरक्षक घर-घर जाकर ट्रैक्टर मालिकों और डग्गी संचालकों को अवैध रेत परिवहन के लिए प्रेरित कर रहा है।
मासिक ‘सेटिंग रेट’ तय
सूत्र बताते हैं कि इस अवैध नेटवर्क में बाकायदा महीना तय किया गया है. प्रति डग्गी ₹25,000 मासिक और प्रति ट्रैक्टर ₹15,000 मासिक
यानी जो देगा, वही नदी लूटेगा और कानून आंख मूंदे रहेगा।

रिलायंस कंपनी के वेल के पास अवैध भंडारण
नदी से निकाली गई रेत को रिलायंस कंपनी के वेल के पास अवैध रूप से स्टॉक किया गया है। वहां मजदूरों के जरिए डग्गियों में रेत भरवाई जाती है और फिर बाजार में सप्लाई होती है। यह सब किसी फिल्मी सीन की तरह नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत है।
सूचना देने पर भी ‘गेंदबाजी’ का खेल
जब इस अवैध उत्खनन की जानकारी बुढ़ार थाना और खनिज विभाग को दी गई, तो कार्रवाई की जगह जिम्मेदारी टालने का खेल शुरू हो गया।
पुलिस कहती है. खनिज विभाग कार्रवाई करे
खनिज विभाग कहता है. पुलिस से करवाई कराइए।
इस पुरे खेल का नतीजा
रेत माफिया मजे में, नदी बर्बाद हो रही हैं, कानून का आंख बंद हैं। सवाल जो जवाब मांगते हैं
जब जिले में कोई वैध रेत खदान नहीं, तो रेत आ कहां से रही है. क्या एक आरक्षक के संरक्षण के बिना इतना बड़ा नेटवर्क चल सकता है. सोन नदी का पर्यावरणीय विनाश आखिर कब रोका जाएगा.
क्या जिम्मेदार अफसर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं. धनगवा में चल रहा यह अवैध रेत साम्राज्य अब सिर्फ कानून व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रशासनिक साख और शासन की मंशा पर सीधा सवाल खड़ा कर रहा है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह रेत माफिया आने वाले दिनों में और ज्यादा बेलगाम होगा।
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इन्होने कहा….
आज हम जांच में जा रहे हैं आप लोकेशन वाली फोटो भेज दें हम कार्यवाही करेंगे, आप बुढ़ार पुलिस को भी सूचित करें.
अभिषेक पटले, खनिज निरीक्षक शहडोल
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Author: The Mukhbir
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