
The mukhbir- राहुल सिंह राणा, शहडोल। जिले में रेत का ठेका हुए 40 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात ठीक होने के बजाय और बिगड़ते जा रहे हैं। सरकारी खदानें बंद पड़ी हैं और शहर में अवैध रेत का साम्राज्य खुलेआम फल-फूल रहा है। नतीजा जनता मजबूर, माफिया मजबूत
48 करोड़ का ठेका… पर खदानें ठप
जनता का सवाल कब शुरू होगा खदान…?
सहकार ग्लोबल लिमिटेड कंपनी ने 10 अक्टूबर 2025 को शहडोल की रेत खदानों का ठेका ₹48,20,40,000 (48 करोड़ 20 लाख 40,000 ) में लिया था। लेकिन आज तक स्वीकृत 34 खदानों में एक भी खदान सुचारू रूप से चालू नहीं हो सकी।
प्रशासनिक प्रक्रियाएँ लटकी फाइल
स्थानीय स्तर पर राजनीति और ग्रामीणों का विरोध, अवैध खनन और माफियाओं की पकड़ के कारण सरकारी रेत बाजार में आ नहीं पा रही और इस खाली जगह पर माफियाओं ने कब्जा कर लिया। मुखबिर की जानकारी अनुसार रेत ठेका कंपनी द्वारा टेंडर कि प्रकिया पूरी करने के बाद भोपाल में प्रशासनिक कार्यवाही जारी हैं. राज्य शासन के अनुमोदन के बाद जल्द से जल्द रेत खदानें संचालित हो जाएंगे.
अवैध रेत उत्खनन का साम्राज्य, कहाँ से आ रही चोरी की रेत.
शहडोल जिले में सरफा नदी (कंचनपुर–सिंहपुर) से दिन-रात ट्रैक्टरों के माध्यम से रेत निकाल कर एक निश्चित स्थान में डंप करने के बाद डग्गी के माध्यम से रेत कि सप्लाई कि जा रही हैं. मजाल हैं कोई अवैध रेत को रोक ले और जांच कर कार्यवाही करें।
सोन नदी में नवलपुर, पटासी, श्यामडीह, हड़हा, रोहनिया और दियापिपर से लगातार अवैध रेत कि खुदाई कर नदी की रेत जैसे ‘ओपन सेल’ में बिक रही हो। जिले के बाकी क्षेत्र ओदरी, बकेली, नरवार, गोहपारू, जयसिंहनगर, ब्यौहारी, बुढ़वा और बुढ़ार यहाँ तो अवैध रेत उत्खनन कर उद्योग की तरह कारोबार चलाया जा रहा है।
रेत के दाम, जनता की जेब पर खुला डाका
शहडोल में रेत की कीमतें किसी भी वैध निर्धारित कीमतों से कई गुना अधिक में बेची जा रही हैं. मुखबिर की जानकारी अनुसार एक डग्गी रेत (160-180 फिट) ₹ 8,500 से ₹ 9,500 और एक हाइवा रेत (550-650 फिट)₹ 27,000 से ₹ 30,000 में आम जनता को बेची जा रही हैं. इतने दाम पर तो लोग घर नहीं, रेत खरीदते-खरीदते कर्जदार हो जाएगे।
कड़वा सच, जिले में माफिया मजबूत, प्रशासन गायब
यह पहली बार नहीं है कि शहडोल में अवैध रेत का खेल चल रहा हो। लेकिन इस बार हालात काबू से बाहर हो चुके हैं। सरकारी ठेका बंद होने के कारण अवैध खदानें खूब फल फूल रहें हैं. रोड पर शाम ढलते ही डग्गीयों की आवाज बढ़ जाती है. और जनता लुटने को मजबूर हो जाती हैं.
बड़े सवाल, जो सरकार और प्रशासन को जवाब देने होंगे..
- • खदानें समय पर चालू क्यों नहीं हो सकीं…?
- •अवैध रेत पर कार्रवाई कौन रोके हुए है…?
- • जनता को महँगी रेत क्यों खरीदनी पड़ रही…?
- • 4. 48 करोड़ की बोली का फायदा किसे, सरकार को या माफियाओं को..?
शहडोल की जनता पर रेत की मार, प्रशासन ‘खामोश’ रेत नहीं मिल रही, और अगर मिल रही है तो सोने के दाम पर। निर्माण कार्य रुके, मजदूर खाली, घर बनाने वालों की कमर टूटी हुई। रेत की समस्या नहीं, पूरी व्यवस्था की विफलता सामने है।
राज्य शासन के अनुमोदन के बाद जल्द से जल्द रेत खदानें संचालित हो जाएंगे.
राहुल शांडिल्य, खनिज अधिकारी शहडोल









