
“बाइट मत देना… बैठने मत देना”—मौखिक आदेशों ने बढ़ाई मीडिया-प्रशासन दूरी, PIB मीडिया वार्ता का सामूहिक बहिष्कार
The mukhnir से तपस गुप्ता उमरिया। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका केवल खबर दिखाना नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच सूचना का सेतु बनना है। लेकिन उमरिया जिले में यह सेतु अब टूटता नजर आ रहा है। जिले में प्रशासन और मीडिया के बीच बढ़ती दूरी अब खुलकर सामने आ गई है। पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि जिला मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने कर्मचारियों को मौखिक रूप से निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या पत्रकार को बाइट न दें, और कार्यालयों में पत्रकारों को बैठने तक न कहा जाए।
पत्रकारों का कहना है कि यह रवैया केवल असहयोग नहीं, बल्कि सूचना-प्रवाह को बाधित करने की सुनियोजित कोशिश है, जो न सिर्फ प्रेस स्वतंत्रता पर सवाल खड़े करता है बल्कि जनता के अधिकारों पर भी चोट है।
“लिखित आदेश नहीं… लेकिन लागू पूरी सख्ती से”
प्रेस क्लब के महासचिव हीरा सिंह ने बताया कि भले ही यह आदेश लिखित रूप में सामने नहीं आया है, लेकिन इसका असर हर सरकारी कार्यालय में साफ दिखाई दे रहा है। पत्रकारों का आरोप है कि कर्मचारियों को यह संदेश दे दिया गया है कि मीडिया से दूरी बनाकर रखें, बातचीत न करें और किसी भी सवाल का जवाब देने से बचें।
पत्रकारों ने कहा कि जब अधिकारी संवाद से बचेंगे, तो जनता तक सही, संतुलित और तथ्यात्मक जानकारी कैसे पहुंचेगी? यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और प्रेस को दबाने जैसी मानसिकता को दर्शाता है।
PIB कार्यक्रम का बहिष्कार: “औपचारिक संवाद सिर्फ दिखावा”
इन्हीं हालातों के चलते उमरिया के पत्रकारों ने 16 जनवरी 2026 को प्रस्तावित प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो (PIB) की मीडिया वार्ता का सामूहिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। पत्रकारों का स्पष्ट कहना है कि “जब स्थानीय स्तर पर प्रशासन संवाद के दरवाजे बंद कर रहा हो, तब सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होना केवल प्रतीकात्मक और दिखावटी रह जाता है।”
कार्यक्रम का विवरण: होटल स्वर्णिम में प्रस्तावित था मीडिया वार्तालाप
गौरतलब है कि पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार, भोपाल द्वारा 15 जनवरी 2026 को मीडिया कवरेज हेतु आमंत्रण जारी किया गया था। आमंत्रण के अनुसार प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, भोपाल द्वारा “विकसित भारत–जी राम जी 2025 अधिनियम” पर मीडिया वार्तालाप कार्यक्रम प्रस्तावित था। यह कार्यक्रम 16 जनवरी 2026, शुक्रवार को प्रातः 11 बजे, होटल स्वर्णिम, उमरिया में आयोजित होना था।
लेकिन जिला स्तर पर प्रशासनिक रवैये के विरोध में पत्रकारों ने इसमें शामिल न होने का फैसला लेकर एक स्पष्ट संदेश दे दिया है कि
“संवाद नहीं तो कवरेज नहीं”
“सरकार पारदर्शिता की बात करती है, लेकिन जिले में मीडिया से दूरी..?”
पत्रकारों का कहना है कि एक तरफ सरकार मंचों से संवाद, पारदर्शिता और मीडिया मित्रता की बातें करती है, वहीं दूसरी ओर जिला स्तर पर अधिकारियों द्वारा पत्रकारों से दूरी रखने के निर्देश दिए जा रहे हैं। यह विरोधाभास अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।
क्या प्रशासन जवाबदेही से बचना चाहता है.
क्या सूचना पर नियंत्रण की कोशिश की जा रही है. क्या जनता को सत्य जानने से रोका जा रहा है. बहिष्कार किसी संस्था के खिलाफ नहीं, “सोच” के खिलाफ है. प्रेस क्लब पदाधिकारियों ने साफ किया कि यह बहिष्कार किसी एक कार्यक्रम या संस्था के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो सवालों से बचने के लिए सूचना के रास्ते बंद करना चाहती है।
पत्रकारों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने अपना रवैया नहीं बदला, संवाद की प्रक्रिया बहाल नहीं की गई और पत्रकारों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित नहीं किया गया तो यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा।
“सूचना रोकना, सच दबाना है”
उमरिया में पत्रकारों का यह सामूहिक बहिष्कार प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि—
लोकतंत्र में संवाद बंद नहीं किया जा सकता।
सूचना रोकना केवल पत्रकारों का अपमान नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों पर हमला है।
अब सवाल यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेकर संवाद बहाल करेगा, या जिले में “नो-बाइट, नो-सवाल” जैसी संस्कृति को और मजबूत करेगा.
The mukhbir टीम उमरिया
Author: The Mukhbir
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