
The mukhbir शहडोल। जिले में पुलिस-जनता संबंधों को मजबूत बनाने और विभागीय अनुशासन को सख्ती से लागू करने के उद्देश्य से शहडोल पुलिस अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव ने बड़ा कदम उठाया है। एसपी ने कोतवाली में पदस्थ आरक्षक आलोक मिंज एवं आरक्षक पप्पू यादव को लोगों से दुर्व्यवहार की शिकायतों पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और संवेदनशीलता को लेकर स्पष्ट संदेश देती है।
लगातार मिल रही थीं शिकायतें
सूत्रों के अनुसार हाल ही में कई नागरिकों ने शिकायत की थी कि दोनों आरक्षक ड्यूटी के दौरान व्यवहारिक मर्यादा का पालन नहीं कर रहे थे। अनुशासनहीनता और असभ्य व्यवहार की इन शिकायतों को एसपी तक पहुंचाया गया, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए गए। जानकारी के अनुसार, आरक्षक पप्पू यादव और आलोक मिंज पांडवनगर बीट पर तैनात थे। करीब एक सप्ताह पहले उन्हें सूचना मिली थी कि पड़ोसी जिले का एक युवक किराए के मकान में एक युवती के साथ रह रहा है। दोनों आरक्षक मौके पर पहुंचे और युवक-युवती को आपत्तिजनक हालत में देखकर अपने मोबाइल से वीडियो बना लिया।इसके बाद दोनों ने वीडियो वायरल करने और मामला दर्ज करने की धमकी देकर यूवक से लाखों रुपए की मांग की। डर के कारण यूवक ने अपने परिचितों से रकम मंगवाकर उन्हें सौंप दी लेकिन युवक के परिचितों को अचानक पैसों की जरूरत का कारण संदेहास्पद लगा, जिसके बाद उन्होंने युवक को उच्च अधिकारियों से शिकायत करने की सलाह दी पीडित युवक ने साक्ष्यों सहित पूरे मामले की शिकायत पुलिस
अधीक्षक रामजी श्रीवास्तव से की। एसपी ने शिकायत गंभीर पाते हुए आरक्षकों को बुलाया और पूछताछ की। पहले तो दोनों ने अनभिज्ञता जताई, लेकिन सबूत सामने आने पर उन्होंने ब्लैकमेल कर रुपए लेने की बात स्वीकार कर ली।
जांच में सही पाए गए आरोप
प्रारंभिक जांच में दोनों आरक्षकों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई। इसके बाद एसपी श्रीवास्तव ने तुरंत दोनों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू करा दी है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि दुर्व्यवहार जैसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं है।
एसपी का कड़ा संदेश, पुलिस का पहला कर्तव्य जनता का सम्मान
एसपी रामजी श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस की वर्दी सिर्फ शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और अनुशासन का दायित्व भी है।
उन्होंने स्पष्ट कहा,
“जनता के साथ असम्मानजनक व्यवहार किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शून्य सहिष्णुता की नीति लागू रहेगी।”
उनका यह बयान पूरे जिले में पुलिसकर्मियों के लिए एक सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
विभागीय जांच जारी
दोनों आरक्षकों के खिलाफ आगे की विभागीय जांच जारी रहेगी। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पुलिस विभाग में अनुशासन, जवाबदेही और संवेदनशीलता को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस निर्णय से यह संदेश भी गया है कि यदि कोई पुलिसकर्मी मर्यादा का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई निश्चित है।
जनता में सकारात्मक संदेश
एसपी की इस कार्रवाई से जनता में भी सकारात्मक संदेश गया है कि पुलिस विभाग शिकायतों को गंभीरता से ले रहा है और अपनी छवि को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
शहडोल पुलिस प्रशासन का यह कदम न केवल अनुशासन को मजबूत करता है बल्कि आम जनता के विश्वास को भी और अधिक सुदृढ़ करता है।









