
The mukhbir राहुल सिंह राणा, शहडोल। जिले में बस संचालन की अव्यवस्थाएं लगातार सामने आ रही हैं। जहां एक ओर यातायात विभाग सड़कों पर उतरकर बिना परमिट और बिना फिटनेस वाली बसों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है, वहीं दूसरी ओर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरटीओ कार्यालय की कई प्रक्रियाएं कार्यालय में न होकर होटल अमन पैलेस में संचालित किए जाने की चर्चाओं ने विभाग पर बड़े आरोप खड़े कर दिए हैं।
यातायात विभाग का एक्शन: दो बसें पकड़ी गईं, भारी चालान
रीवा रोड पर यातायात टीम की चेकिंग के दौरान दादू एंड संस की बस एमपी 17 पी 1248 को रोका गया। बस फिटनेस में फेल मिली और इमरजेंसी एग्जिट विंडो भी नहीं खुल रही थी। ड्राइवर ने पाना (स्पैनर) से इसे खोलने की कोशिश की, जो सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने जैसा है। मौके पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ₹ 5,000 का चालान बनाया गया।
इसी दौरान कैपिटल बस एमपी 18 पी 0206 को भी पकड़ा गया, जो केवल एक दिन के विशेष परमिट पर ब्यौहारी से प्रयागराज के लिए अधिकृत थी। लेकिन इसे शहडोल बस स्टैंड से स्थानीय रूट पर स्टेज कैरिज परमिट की तरह संचालित किया जा रहा था। शहडोल से गोहपारू, खानौधी और जयसिंहनगर तक के यात्री बस में पाए गए। नियमों का उल्लंघन करने पर ₹ 10,000 का चालान किया गया।
इन दोनों मामलों में कार्रवाई यातायात प्रभारी सूबेदार प्रियंका शर्मा की टीम ने की।
लेकिन बड़ा सवाल: आरटीओ की कार्रवाई कहाँ है
यातायात विभाग सड़कों पर सक्रिय है, लेकिन परिवहन विभाग (RTO) की भूमिका संदिग्ध नज़र आने लगी है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, होटल अमन पैलेस में बैठकर परमिट से जुड़े निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे कई बस मालिक मनमर्जी से बसें चलाने का साहस कर रहे हैं। कार्यालय से बाहर इस तरह के कार्य न सिर्फ सिस्टम को कमजोर करते हैं बल्कि निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करते हैं।
परमिट के खेल से यात्रियों की सुरक्षा दांव पर
जब बिना फिटनेस और बिना परमिट के बसें खुलेआम चल रही हों और परिवहन विभाग की निगरानी कमजोर पड़े, तो सबसे बड़ा नुकसान यात्रियों को होता है।
लापरवाही की कीमत सड़क पर सफर करने वाले उन लोगों को चुकानी पड़ती है, जो अपनी सुरक्षा के भरोसे बस में सवार होते हैं।
जनता में आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग
इन ताजा घटनाओं के बाद जिले में चर्चा तेज है कि
यातायात विभाग अगर कार्रवाई कर सकता है, तो RTO विभाग क्यों नहीं..?
क्या विभाग की चुप्पी किसी गहरे ‘परमिट खेल’ की ओर इशारा करती है..?
अब ज़रूरत है कड़ी निगरानी की
विशेषज्ञों का मानना है कि बस मालिकों की मनमानी पर रोक तभी लगेगी जब
- RTO विभाग अपनी कार्यप्रणाली पारदर्शी बनाए
- कार्यालय में ही सभी कार्य हों
- फिटनेस और परमिट जांच सख्ती से लागू की जाए
- संयुक्त अभियान चलाया जाए
जिले में सड़क सुरक्षा बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए विभागों को अपने-अपने स्तर पर जिम्मेदारी निभानी ही होगी।
The mukhbir टीम शहडोल









